Bihar Politics
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सक्रिय राजनीति से दूरी बना रहे हैं। विपक्ष में बढ़ती इस शून्यता के बीच कांग्रेस ने अपनी स्वतंत्र राह पकड़ने के संकेत दिए हैं। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने राजद (RJD) का नाम लिए बगैर बड़ा बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस अब किसी के भरोसे नहीं बैठने वाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस पहले भी मुखर रही है और आगे भी मजबूती से अपनी आवाज उठाएगी। यह बयान दर्शाता है कि महागठबंधन के भीतर अब कांग्रेस अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
मामला केवल राजनीतिक खींचतान तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की महिलाओं के सम्मान से भी जुड़ा है। हाल ही में उत्तराखंड सरकार की मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू ने एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार से 20-25 हजार रुपये में शादियों के लिए महिलाएं मिल जाती हैं। इस टिप्पणी को कांग्रेस ने बिहार की अस्मिता पर चोट बताया है। राजेश राम ने घोषणा की कि बिहार की बेटियों और महिलाओं के इस अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में आगामी 10 जनवरी से पूरे प्रदेश में प्रखंड स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक एक व्यापक जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) योजना में किए गए बदलावों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस कल्याणकारी योजना का नाम बदलकर ‘बीवी जी राम जी’ करना केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि गांधीवादी विचारधारा को मिटाने की साजिश है। राजेश राम के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस योजना को कमजोर करने के लिए राज्य सरकारों के अधिकारों को छीन लिया है और सारा नियंत्रण अपने पास सुरक्षित कर लिया है। उन्होंने इसे मजदूरों के अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि कांग्रेस मनरेगा को बचाने के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के अधिकार को लेकर कांग्रेस अब पीछे हटने के मूड में नहीं है। राजेश राम ने कहा कि बीजेपी से जुड़े लोगों के बयानों और नीतियों से आज महिलाओं का सम्मान खतरे में है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए बिहार कांग्रेस की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है। इसके बाद 10 जनवरी से राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के श्रमिक विरोधी फैसलों का विरोध करना और उत्तराखंड के नेता के बयान पर माफी की मांग करना है। कांग्रेस का मानना है कि सत्ता पक्ष की ये नीतियां समाज के गरीब तबके और महिलाओं के प्रति उनके संकुचित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उतनी ही बुलंद होगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं को खत्म करने की कोशिशों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। कांग्रेस जनता के बीच जाकर यह संदेश देगी कि किस तरह नाम बदलने की राजनीति के पीछे असल में गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती की जा रही है। बिहार कांग्रेस अब राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में खुद को स्थापित करने के लिए इन सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को ढाल बनाकर मैदान में उतर रही है।
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