Bihar Rajya Sabha Election 2026
Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के लिए चार सीटें जीतना बेहद आसान नजर आ रहा है। हालांकि, असली मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर फंसता दिख रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने हार न मानते हुए पांचवीं सीट के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दावा किया है कि एनडीए पांचों सीटों पर क्लीन स्वीप करेगी। इस बयान के बाद मुकाबले के बेहद दिलचस्प और रणनीतिक होने की संभावना बढ़ गई है।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता वाले वोट की आवश्यकता होती है। आंकड़ों पर गौर करें तो एनडीए के पास वर्तमान में कुल 202 विधायकों का मजबूत समर्थन है। इस आधार पर एनडीए अपने 164 वोटों के दम पर चार सीटें तो बिना किसी बाधा के जीत लेगा। इसके बाद भी एनडीए के पास 38 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जिसका अर्थ है कि पांचवीं सीट सुरक्षित करने के लिए उन्हें केवल 3 और वोटों की जरूरत होगी। दूसरी तरफ, आरजेडी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं, जो जीत के जादुई आंकड़े से 6 कम है।
संख्या बल में पीछे होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी पीछे हटने को तैयार नहीं है। पार्टी की हालिया बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह ने स्पष्ट किया कि आरजेडी इस चुनाव में अपना उम्मीदवार जरूर उतारेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्षी एकजुटता को धार देने के लिए स्वयं तेजस्वी यादव राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। आरजेडी की रणनीति छोटे दलों जैसे एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा को अपने पाले में लाने की है। यदि अख्तरूल ईमान के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के 6 विधायक और बसपा का 1 विधायक महागठबंधन को वोट देते हैं, तो मुकाबला कांटे का हो सकता है।
चिराग पासवान की अध्यक्षता में पटना में हुई लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की बैठक में सभी 19 विधायकों ने एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का संकल्प लिया है। चिराग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एनडीए के भीतर कोई फूट नहीं है और वे पांचवीं सीट भी जीतकर विपक्ष को करारा जवाब देंगे। इसके साथ ही जीतन राम मांझी की ‘हम’ (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। चूंकि उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इसलिए एनडीए की पांचवीं सीट के लिए वे भी एक प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
राज्यसभा की इस पांचवीं सीट ने भाजपा और जेडीयू के सामने भी चुनौती पेश की है। चार सीटों पर दो-दो उम्मीदवार भेजने के बाद पांचवीं सीट किसे दी जाए, इस पर गठबंधन के भीतर गहन मंथन जारी है। क्या यह सीट किसी सहयोगी दल के खाते में जाएगी या भाजपा-जेडीयू मिलकर कोई नया चेहरा उतारेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि एनडीए अपने कुनबे को एकजुट रखने में सफल रहता है, तो आरजेडी के लिए सेंधमारी करना नामुमकिन होगा। कुल मिलाकर, बिहार का यह चुनाव केवल संख्या बल की लड़ाई नहीं, बल्कि गठबंधन धर्म और रणनीतिक कौशल की अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।
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