Bihar Politics
Bihar Politics: बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। सत्ताधारी एनडीए (NDA) ने अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए सभी पांच सीटों पर कब्जा कर लिया है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केवल एक उम्मीदवार, अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। एनडीए के लिए सबसे बड़ी खबर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीत है, जो अब आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सांसद बन चुके हैं। पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार की जीत ने एनडीए के रणनीतिक कौशल को साबित किया, जिन्हें प्रथम वरीयता के मत कम होने के बावजूद द्वितीय वरीयता के आधार पर विजेता घोषित किया गया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद अब बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नियमों के अनुसार, ऊपरी सदन (राज्यसभा) के लिए चुने जाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबरों के साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह जीत न केवल नीतीश कुमार के कद को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि बिहार में भाजपा और जदयू के गठबंधन के नए स्वरूप की आधारशिला भी रखेगी।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एनडीए के उम्मीदवारों ने ठोस मतों के साथ जीत हासिल की। मतदान का विस्तृत विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| उम्मीदवार का नाम | दल | प्रथम वरीयता के मत |
| नीतीश कुमार | जदयू | 44 |
| नितिन नवीन | भाजपा | 44 |
| राम नाथ ठाकुर | जदयू | 42 |
| उपेंद्र कुशवाहा | रालोमो | 42 |
| शिवेश कुमार | भाजपा | 30 (द्वितीय वरीयता से जीत) |
चुनावी प्रक्रिया के दौरान महागठबंधन के भीतर दरार साफ नजर आई। मंत्री श्रवण कुमार के दावे के अनुसार, एनडीए के सभी 202 विधायकों ने एकजुट होकर मतदान किया, जबकि विपक्ष के चार महत्वपूर्ण विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे। अनुपस्थित रहने वालों में राजद के फैजल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायक—मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास शामिल थे। बांकीपुर विधायक नितिन नवीन और जेल में बंद अनंत सिंह जैसे दिग्गजों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिससे एनडीए की राह आसान हो गई।
नतीजों के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर ‘विधायकों की चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनके तीन विधायकों को भाजपा ने प्रलोभन देकर या दबाव बनाकर गायब कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि 13 तारीख तक सभी विधायक संपर्क में थे, लेकिन उसके बाद उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया और उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा है कि वे इन बागी विधायकों पर कड़ी कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे।
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