Bihar Voter List Issue: बिहार में हाल ही में प्रकाशित संशोधित मतदाता सूची में एक बार फिर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बावजूद, सूची में हजारों ऐसी त्रुटियां मिली हैं, जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती हैं, बल्कि चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला जमुई जिले की चौडीहा पंचायत के एक बूथ से सामने आया है, जहां एक ही मकान में 230 मतदाता दर्ज हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सभी अलग-अलग घरों में रहते हैं, उनके पते और मकान नंबर अलग हैं, लेकिन मतदाता सूची में सबका एक ही घर बताया गया है।
मकान नंबर 0, 00, 000 – तीन लाख से ज्यादा मतदाता
राज्य भर में जारी मसौदा सूची में लगभग 2.92 लाख मतदाताओं के पते पर मकान नंबर ‘0’, ’00’ या ‘000’ दर्ज है। इससे मतदाताओं की पहचान, क्षेत्रीय आधार और बूथ आवंटन की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हो सकती है। यह चुनावी पारदर्शिता के लिहाज़ से बेहद गंभीर मामला है।
बीएलओ पर लापरवाही का आरोप
निवासियों ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मौके पर जाकर जांच नहीं की, बल्कि दफ्तर में बैठकर ही फॉर्म भर दिए। कई मामलों में मृत लोगों के नाम अब भी सूची में दर्ज हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “मेरे दादा की मृत्यु पांच साल पहले हो गई थी, लेकिन उनका नाम अब भी सूची में मौजूद है।”
विपक्ष का आरोप: “मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा”
विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीएलओ को दिए गए लक्ष्य पूरे करने के चक्कर में फर्जी फॉर्म भरे गए। कुछ मतदाताओं के नाम खुद उनके बिना जानकारी के दर्ज कर दिए गए, जबकि कई मृत लोगों के नाम भी जीवित मतदाता के रूप में सूची में शामिल हैं।
तकनीकी कारण या साजिश?
स्थानीय बीएलओ का कहना है कि यह गलतियां तकनीकी कारणों से हुई हैं और उन्होंने इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह महज़ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि प्रणालीगत लापरवाही और गंभीर प्रशासनिक चूक का नतीजा है।
अन्य राज्यों में भी सामने आईं ऐसी गड़बड़ियां
यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है। हाल ही में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी ऐसे ही मामलों को उजागर किया था, जहां एक कमरे के घर में 80 वोटर और विभिन्न उपनामों वाले एक ही परिवार के 43 सदस्य पाए गए।
चुनाव आयोग का दावा है कि गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य फर्जी और मृत मतदाताओं को सूची से हटाना है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कह रही है। यदि यह गड़बड़ियां समय रहते ठीक नहीं की गईं, तो इससे आगामी चुनावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
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