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Bihar Election 2025: बिहार इस बार मनाएगा चार दिवाली! अररिया में अमित शाह ने बताई बड़ी वजह

Bihar Election 2025: बिहार इस साल एक नहीं बल्कि चार दिवाली मनाने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया अररिया दौरे के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से यह वर्ष बिहार के लिए बेहद खास होने वाला है।

चार दिवाली की बात क्यों कर रहे हैं अमित शाह?

गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में बिहार की जनता को चार अलग-अलग ‘दिवाली’ का ज़िक्र करते हुए इनकी महत्ता समझाई।

पहली दिवाली: जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे, उसी स्मृति में हर साल दीपावली मनाई जाती है।

दूसरी दिवाली: जीविका दीदीयों के बैंक खातों में ₹10,000 की आर्थिक सहायता प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेजी गई, जिसे शाह ने आर्थिक सशक्तिकरण की दिवाली बताया।

तीसरी दिवाली: GST रिफॉर्म को लेकर, जिसमें 395 से अधिक वस्तुओं पर 15-20% टैक्स में कटौती की गई है। इससे देश के मध्यमवर्ग और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली।

चौथी दिवाली: बिहार में जब NDA-BJP को 160 से ज्यादा सीटों पर जीत मिलकर सरकार बनेगी, वह राजनीतिक दिवाली होगी।

NDA की सरकार बनाकर घुसपैठियों को निकालने का वादा

अररिया की सभा में शाह ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों का नहीं बल्कि बिहार की सुरक्षा और अस्मिता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जनता से अपील की कि NDA को दो-तिहाई बहुमत से जिताएं, ताकि भाजपा बिहार से घुसपैठियों को बाहर निकालने का काम कर सके।

विपक्ष पर तीखा हमला

अमित शाह ने लालू यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि “लालू एंड कंपनी ने बिहार को लूटा है। राहुल गांधी की यात्रा केवल इसलिए निकाली गई क्योंकि चुनाव आयोग बिहार की मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटा रहा है।”उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चाहता है कि घुसपैठियों को वोटिंग का अधिकार मिले ताकि वे अपनी सत्ता बनाए रख सकें।

चुनावी रंग में रंगा बिहार

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की तारीखें दिवाली के आसपास तय होने की संभावना है। ऐसे में अमित शाह की यह “चार दिवाली” वाली रणनीति चुनाव प्रचार का हिस्सा बन चुकी है। यह बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को जोड़ता है, बल्कि सरकारी योजनाओं और राष्ट्रवादी एजेंडे को भी चुनावी मुद्दा बनाता है।

अमित शाह का “चार दिवाली” वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक लाइन नहीं, बल्कि NDA की चुनावी रणनीति की झलक है जिसमें धार्मिक आस्था, आर्थिक योजनाएं, कर सुधार और राष्ट्रवाद – सभी को एक मंच पर लाकर जनता को संदेश देने की कोशिश की गई है। बिहार की जनता इस बार किस दिवाली को असली दिवाली मानती है, यह आने वाले चुनावी नतीजे तय करेंगे।

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