Bihar Election 2025: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने हालिया बयान में सीधे-सीधे बड़े राजनीतिक दलों और नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि आगामी चुनाव एक “फिक्स मैच” बन चुका है। प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नेताओं के बीच अपशब्दों की राजनीति की जा रही है, जिससे जनता भ्रमित हो रही है।

तेजस्वी यादव पर निशाना
प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अपशब्द कहे गए, लेकिन तेजस्वी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि तेजस्वी की मां राबड़ी देवी, जो खुद बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, वही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अपना “भाई” कहती हैं। प्रशांत किशोर ने इसे “जनता को बेवकूफ बनाने की राजनीति” करार दिया।

बिहारी युवाओं का मुद्दा गायब?
प्रशांत किशोर ने यह गंभीर आरोप लगाया कि चाहे भाजपा हो या विपक्ष, कोई भी दल महाराष्ट्र, तमिलनाडु या दिल्ली में बिहारी युवाओं को मिल रही गालियों और अपमान पर आवाज नहीं उठा रहा। उन्होंने कहा, “चुनाव के वक्त सब एक-दूसरे को अपशब्द कहने में लगे हैं, लेकिन असल मुद्दे जैसे कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, रोजगार, और बिहारी अस्मिता – इन पर कोई बात नहीं करता।”
“फिक्स मैच” का क्या मतलब?
प्रशांत किशोर के अनुसार, यह चुनाव पहले से तय स्क्रिप्ट के अनुसार चलाया जा रहा है, जिसमें सभी प्रमुख दल जनता को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर असली सवालों से दूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर किसी नेता की मां को गाली दी जाती है, तो उसका जवाब सियासी मंच पर क्यों नहीं दिया जाता? और फिर वही नेता दूसरे दल के नेता से भाईचारे की बात करता है – यह जनता को भ्रम में डालने की कोशिश नहीं तो और क्या है?”
प्रशांत किशोर के इस बयान से बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर उन्होंने सीधे तौर पर सभी दलों की “साठगांठ” की ओर इशारा किया है, वहीं दूसरी ओर बिहारी अस्मिता और युवाओं के मुद्दों को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि क्या जनता इस बार इन बयानों के पीछे की सच्चाई को पहचानेगी, या फिर एक बार फिर सियासी जुमलों के बीच असली मुद्दे खो जाएंगे।











