Bijapur Naxal Surrender
भारत में ‘लाल आतंक’ की कमर तोड़ने के सुरक्षाबलों के प्रयास रंग ला रहे हैं। पिछले एक साल में, कई बड़े नक्सल कमांडरों को मार गिराया गया है और बड़ी संख्या में नक्सली मुठभेड़ों का सामना कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसे सुरक्षाबलों का खौफ कहें या नक्सलियों की मुख्यधारा से जुड़ने की इच्छा, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि अब वे हथियार डाल रहे हैं। इसी कड़ी में, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बड़ी सफलता की खबर आई है, जहाँ 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हथियार छोड़ दिए हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में से 26 पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले 34 नक्सलियों के समूह में कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जो विभिन्न नक्सली संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। इनमें मुख्य रूप से दक्षिण सब जोनल ब्यूरो के सदस्य और तेलंगाना स्टेट कमेटी तथा AOB (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर) डिवीजन के नक्सली शामिल हैं। नक्सलियों के ये विभिन्न क्षेत्रों से आना दर्शाता है कि सुरक्षाबलों का दबाव एक व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। सरेंडर करने वाले इस समूह में 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो मुख्यधारा में लौटने की इच्छा रखती हैं।
बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई, ऑपरेशन और प्रशासन की समर्पण नीति के कारण नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार हुआ है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से लेकर अब तक, बीजापुर जिले में कुल 824 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह आँकड़ा नक्सलवाद को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
इसके अलावा, सुरक्षाबलों ने इसी अवधि में 1079 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुठभेड़ों में 220 नक्सली ढेर हुए हैं। आत्मसमर्पण करने, गिरफ्तार होने और मुठभेड़ों में मारे जाने वाले नक्सलियों की यह विशाल संख्या दर्शाती है कि क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान बेहद प्रभावी ढंग से चल रहा है और इसका सीधा परिणाम नक्सली संगठनों के कमजोर होने के रूप में सामने आ रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भारी इनाम घोषित था। ये नाम और उन पर घोषित इनाम की राशि इस प्रकार है:
पंडरू पूनेम उर्फ संजू (45): बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के मेटापाल एर्रापारा का निवासी। इस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।
रूकनी हेमला (25): बासागुड़ा थाना क्षेत्र के कोरसगुड़ा मेटापारा गाँव निवासी। इस पर भी 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
देवा उईका (22): बासागुड़ा के सुकनपल्ली कुंजामपारा गाँव निवासी। इस पर भी 8 लाख रुपये का इनाम था।
रामलाल पोयाम उर्फ रामलू (27): जांगला थाना क्षेत्र के कोतरापाल काकड़पारा निवासी। इस पर भी 8 लाख रुपये का इनाम था।
मोटू पुनेम उर्फ रवि (21): हिरोली सरपंचपारा निवासी। इस पर भी 8 लाख रुपये का इनाम था।
मीना माड़वी उर्फ जमली (26): एड़समेटा कड़ियापारा निवासी। इस पर 5 लाख रुपये का इनाम था।
सुदरू पुनेम (27): एड़समेटा निवासी। इस पर 5 लाख रुपये का इनाम था।
इन प्रमुख कमांडरों का समर्पण नक्सली संगठनों के नेतृत्व और उनकी क्षमता पर सीधा प्रहार है।
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