Bilaspur Deer Poaching
Bilaspur Deer Poaching : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थानों से जुड़ा एक रिसॉर्ट ही शिकार का अड्डा बन गया। कोटा क्षेत्र के बेलगहना स्थित ‘कुरदर एथनिक रिसॉर्ट’ में वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर हिरण के मांस की बरामदगी की है। यह रिसॉर्ट छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित किया जाता है। विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि यहाँ प्रतिबंधित वन्यजीव का शिकार कर उसका मांस पकाया जा रहा है। इस दबिश के दौरान न केवल मांस जब्त किया गया, बल्कि रिसॉर्ट के मैनेजर और कुक सहित चार कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया गया है।
शुक्रवार को जब वन विभाग की टीम ने कुरदर स्थित एथनिक रिसॉर्ट में अचानक छापा मारा, तो दृश्य विचलित करने वाला था। रिसॉर्ट के किचन में कड़ाही पर हिरण का मांस पकाया जा रहा था। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पका हुआ मांस और संबंधित बर्तन जब्त कर लिए। जांच में पता चला कि यह दावत रिसॉर्ट के कर्मचारियों और मैनेजर के लिए तैयार की जा रही थी। पकड़े गए आरोपियों में रिसॉर्ट मैनेजर रजनीश सिंह, कुक रामकुमार टोप्पो, कर्मचारी रमेश यादव और संजय वर्मा शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आरोपियों के बीच खींचतान शुरू हो गई। मैनेजर रजनीश सिंह और अन्य कर्मचारियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए सारा दोष कुक रामकुमार टोप्पो पर डाल दिया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि किचन में क्या पक रहा है। वहीं, कुक रामकुमार ने बचाव में कहा कि उसे गांव के एक व्यक्ति ‘जनक बैगा’ ने पत्ते में लपेटकर यह मांस लाकर दिया था और उसे नहीं पता था कि यह हिरण का है। हालांकि, वन विभाग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए सभी को मुख्य आरोपी माना है क्योंकि प्रतिबंधित मांस रिसॉर्ट के भीतर पाया गया था।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए मांस के नमूनों को पुष्टि के लिए जबलपुर स्थित स्टेट फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। यद्यपि प्राथमिक जांच में यह हिरण का मांस प्रतीत हो रहा है, लेकिन कानूनी साक्ष्य के रूप में लैब रिपोर्ट अनिवार्य है। विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि रिसॉर्ट परिसर से हिरण के अन्य अवशेष (जैसे खाल, सींग या हड्डियां) बरामद नहीं हुए हैं। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि शिकार कहीं और किया गया और मांस को ठिकाने लगाने के लिए रिसॉर्ट का उपयोग किया जा रहा था।
यह घटना इस क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कोटा और बेलगहना के जंगलों में पहले भी करंट लगाकर बाघ, तेंदुए और जंगली सूअरों के शिकार की खबरें आती रही हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में संचालित कई निजी रिसॉर्ट्स में भी पर्यटकों या रसूखदारों को ‘वाइल्ड मीट’ परोसने का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। अब तक वन विभाग की नजर केवल जंगलों तक सीमित थी, लेकिन सरकारी रिसॉर्ट में इस खुलासे के बाद अब निजी रिसॉर्ट्स की भी गहन तलाशी और निगरानी की योजना बनाई जा रही है।
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