Bomb Threat
Bomb Threat : छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। शुक्रवार को जब कोर्ट परिसर अपनी सामान्य कार्यप्रणाली में व्यस्त था, तभी एक अज्ञात ईमेल ने पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा दिए। जैसे ही यह खबर फैली कि परिसर में बम हो सकता है, वहां मौजूद न्यायाधीशों, वकीलों और पक्षकारों के बीच अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। हालांकि, त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला, लेकिन बार-बार मिल रही इन धमकियों ने न्यायिक गलियारों में असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है।
धमकी भरा ईमेल प्राप्त होते ही बिलासपुर पुलिस तत्काल ‘अलर्ट मोड’ पर आ गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वॉयड की टीम मौके पर पहुंची। कोर्ट रूम से लेकर चैंबर, कैंटीन और पार्किंग एरिया के चप्पे-चप्पे की गहन तलाशी ली गई। पुलिसकर्मियों ने मेटल डिटेक्टर के जरिए हर संदिग्ध वस्तु की जांच की। घंटों चले इस सर्च ऑपरेशन के बाद राहत की बात यह रही कि परिसर में कोई भी विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बावजूद, एहतियातन कोर्ट के सभी प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगा दिए गए हैं और आने-जाने वालों की सघन चेकिंग की जा रही है।
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले महज 90 दिनों के भीतर यह तीसरा अवसर है जब बिलासपुर कोर्ट को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इससे पहले न केवल जिला कोर्ट बल्कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को भी इसी तरह डिजिटल माध्यम से उड़ाने की चेतावनी दी जा चुकी है। बार-बार एक ही पैटर्न पर मिल रही इन धमकियों ने जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हर बार जांच में कुछ नहीं मिलता, जिससे यह प्रतीत होता है कि कोई शरारती तत्व या संगठित गिरोह न्यायिक कार्य में बाधा डालने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ‘होक्स कॉल’ या फर्जी ईमेल का सहारा ले रहा है।
बिलासपुर जिला न्यायालय की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिदिन सैकड़ों न्यायाधीश और करीब एक हजार से अधिक वकील अपनी सेवाएं देते हैं। साथ ही, हजारों की संख्या में पक्षकार और आम नागरिक अपने मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी वाले स्थान पर बम की धमकी मिलना न केवल डरावना है, बल्कि यह न्यायिक गरिमा पर भी प्रहार है। वकीलों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से उनके काम करने के मानसिक वातावरण पर बुरा असर पड़ रहा है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम स्थायी रूप से होने चाहिए।
इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद, अब तक पुलिस और साइबर सेल आरोपियों तक पहुंचने में नाकाम रही है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का दावा है कि ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है, लेकिन शातिर अपराधी अक्सर वीपीएन (VPN) या एन्क्रिप्टेड सर्वर का उपयोग कर अपनी पहचान छिपा लेते हैं। छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों के न्यायालयों में भी इसी तरह की धमकियां मिलने की खबरें आई हैं, जिससे यह मामला अंतरराज्यीय साजिश की ओर भी इशारा करता है। फिलहाल, बिलासपुर पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि जल्द से जल्द इन ‘डिजिटल अपराधियों’ को बेनकाब किया जा सके।
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