Bilaspur Loot Case
Bilaspur Loot Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक सराफा कारोबारी के साथ हुई 3.35 करोड़ रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक संक्षिप्त मुठभेड़ (शॉर्ट एनकाउंटर) के बाद दो प्रमुख आरोपियों को दबोच लिया है। मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने जब बदमाशों को आत्मसमर्पण करने के लिए ललकारा, तो उन्होंने भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली बदमाशों के पैर में लगी, जिससे वे घायल होकर गिर पड़े। उत्तर प्रदेश पुलिस के मिर्जापुर क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ और यूपी पुलिस के बीच सूचनाओं के तालमेल की सफलता को साबित किया है।
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ पुलिस आरोपियों के डिजिटल और तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच गई थी। यूपी पुलिस को इनपुट मिलते ही सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया। मिर्जापुर के पास जब पुलिस ने संदिग्धों को रुकने का इशारा किया, तो बदमाश भागने लगे। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया, जिसके जवाब में पुलिस ने फायरिंग की। इस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी विजय लाम्बा और उसके एक अन्य साथी के पैर में गोली लगी है। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यूपी पुलिस आज दोपहर तक इस पूरे मामले का औपचारिक खुलासा मिर्जापुर में करने वाली है।
बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत राजकिशोर नगर में मंगलवार की रात सराफा कारोबारी संतोष तिवारी के साथ यह बड़ी वारदात हुई थी। लुटेरों ने कारोबारी को निशाना बनाकर करोड़ों के जेवरात और उनकी कार लूट ली थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्वयं मोर्चा संभाला और मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। पुलिस ने तत्काल शहर के आउटर इलाकों की नाकेबंदी की, जिसके परिणामस्वरूप उरतुम ग्राम के पास कारोबारी की लूटी हुई कार लावारिस हालत में बरामद कर ली गई। कार मिलने के बाद पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपियों का रूट ट्रैक करने में मदद मिली।
पुलिस की गहन जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि लुटेरों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी तरह चोरी के वाहनों का इस्तेमाल किया था। वारदात में उपयोग की गई बाइक अंबिकापुर में तैनात एक नगर सैनिक राकेश चौबे की थी, जिसे 13 फरवरी को मैनपाट से चुराया गया था। इसी तरह, घटना से एक दिन पहले जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र से एक सफेद रंग की इको वैन भी चोरी की गई थी। बदमाशों ने इन वाहनों का इस्तेमाल इसलिए किया ताकि पुलिस असली मालिक तक पहुंचे और लुटेरे सुरक्षित निकल जाएं। हालांकि, तकनीकी टीम ने टावर डंप और ‘नेफिस’ (NAFIS) सर्वर पर मौजूद फिंगरप्रिंट डाटा के मिलान से आरोपियों की पहचान सुनिश्चित कर ली।
इस मेगा लूट कांड को सुलझाने के लिए बिलासपुर पुलिस ने 10 अलग-अलग टीमें गठित की थीं। इन टीमों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई थी; तीन टीमें यूपी, बिहार और झारखंड के रास्तों पर तकनीकी इनपुट के आधार पर पीछा कर रही थीं, जबकि अन्य टीमें शहर के होटलों, लॉज और पिछले तीन दिनों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी थीं। एफएसएल (FSL) की टीम ने घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक सुरागों को इकट्ठा किया, जिससे आरोपियों के पेशेवर अपराधी होने की पुष्टि हुई। छत्तीसगढ़ पुलिस की मुस्तैदी और यूपी पुलिस के त्वरित एक्शन ने करोड़ों की लूट के इस मामले को महज 48 घंटों के भीतर अंजाम तक पहुंचा दिया।
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