Bilaspur Petrol Diesel Crisis : न्यायधानी बिलासपुर और उसके आसपास के इलाकों में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत देखी जा रही है। शहर और बाहरी क्षेत्रों के लगभग 13 पेट्रोल पंप पूरी तरह से ‘ड्राई’ हो चुके हैं, जिससे वाहन चालकों के बीच हड़कंप मच गया है। सबसे बुरा हाल हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के पंपों का है, जहाँ तेल की बूंद भी उपलब्ध नहीं है। वहीं भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOCL) के पंपों पर भी स्टॉक लगातार कम हो रहा है। बिलासपुर-कोरबा रूट पर स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। उसलापुर, कोनी, सेंदरी और सकरी जैसे क्षेत्रों में लोग एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

दहशत में वाहन चालक: टैंक फुल कराने की मची होड़ और लंबी कतारें
ईंधन खत्म होने की खबर फैलते ही शहर के सक्रिय पंपों पर सामान्य दिनों के मुकाबले भीड़ कई गुना बढ़ गई है। टैगोर चौक, पुलिस पेट्रोल पंप और सीपत चौक जैसे प्रमुख केंद्रों पर बुधवार को भारी अफरातफरी देखी गई। लोग भविष्य में किल्लत बढ़ने के डर से अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने में जुटे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि जहाँ पेट्रोल उपलब्ध है, वहां कर्मचारियों ने कटौती शुरू कर दी है ताकि अधिक से अधिक लोगों को ईंधन मिल सके। कई वाहन चालक साफ तौर पर कह रहे हैं कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो उनकी दैनिक आवाजाही और कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में राशनिंग: 200 से 500 रुपये तक सीमित हुई पेट्रोल की बिक्री
शहर की तुलना में ग्रामीण इलाकों के हालात और भी खराब हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के पंप संचालकों ने अपने स्तर पर तेल की बिक्री सीमित (राशनिंग) कर दी है। यहाँ बाइक सवारों को 500 रुपये के बजाय मात्र 200 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है, जबकि कारों के लिए 1000 रुपये की सीमा तय की गई है। बड़े वाहनों को भी सीमित मात्रा में ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। संचालकों का कहना है कि उन्होंने कंपनियों को एडवांस भुगतान कर दिया है, फिर भी डिपो से सप्लाई मिलने में दो से तीन दिनों की देरी हो रही है। इस देरी ने ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
कीमतों का खेल और कोटा सिस्टम: कमर्शियल वाहनों के दबाव से बढ़ी मुश्किल
ईंधन संकट के पीछे एक बड़ा कारण कमर्शियल डीजल की बढ़ती कीमतें भी हैं। कमर्शियल पंपों पर रेट बढ़ने के कारण भारी वाहन चालक अब सामान्य पंपों का रुख कर रहे हैं, जिससे सामान्य पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए कई कंपनियों ने ‘कोटा सिस्टम’ लागू किया है, जिसके तहत एक बार में 40 से 50 लीटर से ज्यादा ईंधन नहीं दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कालाबाजारी रोकना और स्टॉक को समान रूप से वितरित करना है। हालांकि, इस व्यवस्था से ट्रांसपोर्टरों और मालवाहक वाहन संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्हें लंबी दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है।
प्रशासन का दावा और कलेक्टर की बैठक: जल्द आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने गुरुवार को ऑयल कंपनियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। प्रशासन का दावा है कि जिले में अभी भी पांच दिन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। फूड कंट्रोलर अमृत कुजूर के अनुसार, शहर के 9 पंपों का भुगतान हो चुका है और टैंकर डिपो से रवाना हो चुके हैं, जो गुरुवार तक पहुँच जाएंगे। पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष नवदीप सिंह अरोरा ने भी भरोसा दिलाया है कि कुछ पंपों पर देरी जरूर हुई है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और जल्द ही सभी पंपों पर आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। फिलहाल, प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है ताकि आम जनता को और अधिक परेशानी न हो।


















