Student Suicide
Student Suicide: छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां 11वीं कक्षा के एक छात्र ने अपने ही घर के आंगन में पेड़ से लटककर जान दे दी। मृतक की पहचान 16 वर्षीय अरविंद पटेल के रूप में हुई है, जो सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मंगला धुरीपारा का निवासी था। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि अरविंद गलत संगत में पड़कर नशे का आदी हो चुका था। नशे की इस लत के कारण उसका पढ़ाई से मन उचट गया था और वह मानसिक रूप से भी परेशान रहता था। उसके पिता राजेश पटेल, जो पेशे से किसान हैं, बेटे की इन आदतों से काफी चिंतित रहते थे।
अरविंद की पढ़ाई को लेकर लापरवाही का आलम यह था कि वह अपनी मर्जी से स्कूल जाता था। परिजनों ने बताया कि वह पिछले एक महीने से स्कूल नहीं गया था। 10-15 दिन पहले जब 11वीं की परीक्षाएं शुरू हुईं, तो उसने केवल एक विषय का पेपर दिया और उसके बाद रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। वह पिछले पांच दिनों से घर भी नहीं आया था। 24 मार्च की रात वह अचानक चुपके से घर लौटा, जब घर के सभी सदस्य सो चुके थे। किसी को उसके आने की भनक तक नहीं लगी और इसी दौरान उसने आंगन के पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाया और उस पर झूल गया। अगली सुबह जब परिजनों की आंख खुली, तो सामने बेटे की लाश लटकती देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
दूसरी विचलित करने वाली घटना सक्ती जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जुनवानी से आई है। यहां महज 10 साल की मासूम ललिता महंत की लाश घर के बाथरूम में गमछे के फंदे से लटकती मिली। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली ललिता 25 मार्च की सुबह अपने घर की बाड़ी में खेल रही थी। काफी देर तक जब वह दिखाई नहीं दी, तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। इस दौरान बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला। जब अनहोनी की आशंका में परिजनों ने दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नजारा देख सबकी चीख निकल गई। बच्ची फंदे पर लटकी हुई थी।
ललिता को आनन-फानन में फंदे से उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला नहीं लग रहा है। आशंका जताई जा रही है कि बच्ची खेल-खेल में फंदे से उलझ गई होगी और यह एक दर्दनाक हादसा बन गया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। जैजैपुर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। इस घटना ने पूरे गांव में मातम पसरा दिया है।
छत्तीसगढ़ में बच्चों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। ठीक एक हफ्ते पहले 19 मार्च को दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में भी ऐसी ही घटना घटी थी। वहां 10 साल की गुरप्रीत कौर ने सिर्फ इसलिए सुसाइड कर लिया था क्योंकि उसके बड़े भाई ने उसे दरवाजा देर से खोलने पर डांट दिया था। उस समय गुरप्रीत अपने पिता से फोन पर बात कर रही थी और भाई की आवाज नहीं सुन पाई थी। छोटी सी नाराजगी में बच्ची ने गैलरी में चुन्नी का फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। इन घटनाओं ने अभिभावकों और समाज के सामने बच्चों की मानसिक स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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