Bilaspur Suspected Bangladeshi Case : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कथित तौर पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े मामले में नया अपडेट सामने आया है। 5 सितंबर को STF की कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों की जांच के लिए रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। अब इनमें से 18 लोगों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिहा कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में इन 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है।
पांच लोगों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी
जांच प्रक्रिया के दौरान पांच लोगों के दस्तावेजों में कुछ कमियां या विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है। इन पांच लोगों को फिलहाल रिहा नहीं किया गया है और उनके दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस संबंधित रिकॉर्ड और अतिरिक्त पहचान दस्तावेजों को हासिल कर उनकी नागरिकता और पहचान से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
पहचान और दस्तावेजों को लेकर उठे थे सवाल
STF की कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ लोगों की पहचान से जुड़े दस्तावेजों में ऐसी जानकारी मिली थी, जिसके कारण संदेह पैदा हुआ। शुरुआती जांच में कुछ दस्तावेजों में पिता के स्थान पर ससुर का नाम दर्ज होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से संबंधित कागजात को लेकर भी पुलिस ने सवाल उठाए थे। इन्हीं दस्तावेजी विसंगतियों के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान और पते का दोबारा सत्यापन शुरू किया गया था।
शुरुआती जांच में बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह
पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई के दौरान इन लोगों की नागरिकता को लेकर संदेह जताया था। इसी आधार पर उन्हें तत्काल रिहा करने के बजाय पहचान और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के लिए डिटेंशन सेंटर भेजा गया। हालांकि, बाद की सत्यापन प्रक्रिया में 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इससे स्पष्ट है कि शुरुआती संदेह और अंतिम दस्तावेजी सत्यापन के निष्कर्षों में अंतर सामने आया है।
सिरगिट्टी इलाके में अलग-अलग काम करते थे लोग
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली थी कि इनमें से अधिकांश लोग बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते थे। कुछ लोग बाल के बदले बर्तन उपलब्ध कराने का काम करते थे, जबकि कुछ लोग टेंट और पंडाल लगाने जैसे काम से जुड़े हुए थे। पुलिस ने उनके स्थानीय संपर्कों, रहने की जगह और कामकाज से संबंधित जानकारी भी जुटाई थी।
पश्चिम बंगाल के बताए पते की भी हुई जांच
पुलिस की जांच केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रही। संबंधित लोगों ने जिन स्थानों को अपना मूल पता बताया था, वहां के दस्तावेजों और स्थानीय रिकॉर्ड की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी की गई। पश्चिम बंगाल से जुड़े बताए गए पतों और पहचान संबंधी कागजात का सत्यापन भी जांच का हिस्सा रहा। अधिकारियों का उद्देश्य उपलब्ध दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक पहचान की पुष्टि करना है।
SIR प्रक्रिया से जुड़े नामों की भी जानकारी
इस मामले में कुछ लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के तहत हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता या पहचान को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक सत्यापन के आधार पर ही निकाला जाएगा। फिलहाल पुलिस बाकी पांच लोगों के मामलों में उपलब्ध कागजात और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
पांच लोगों के अतिरिक्त दस्तावेज मंगाए जा रहे
18 लोगों की नागरिकता की पुष्टि के बाद पुलिस का मुख्य फोकस अब बाकी पांच लोगों के दस्तावेजों पर है। जांच टीम अतिरिक्त पहचान पत्र, मूल निवास से जुड़े कागजात और संबंधित क्षेत्रों के रिकॉर्ड मंगवा रही है। जिन दस्तावेजों में कमी या विसंगति पाई गई है, उनका सत्यापन संबंधित थानों और स्थानीय प्रशासनिक रिकॉर्ड के जरिए किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही इन पांच लोगों के संबंध में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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