Birbhum News
Birbhum News: पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक फिजां के बीच अब वर्षों पुराने विवाद सुलझने लगे हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट और बदलती परिस्थितियों के बीच बीरभूम जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के रामपुरहाट में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर की संपत्ति, जिस पर कथित तौर पर राजनीतिक कब्जा कर लिया गया था, उसे अब मुक्त करा लिया गया है। इस कदम से न केवल मंदिर समिति बल्कि पूरे क्षेत्र के हिंदू समाज और श्रद्धालुओं में हर्ष का माहौल है।
बीरभूम जिले के रामपुरहाट नगरपालिका अंतर्गत वार्ड संख्या 15 में स्थित ‘श्री श्री राधा गोविंद मंदिर’ क्षेत्र की पहचान है। इस मंदिर की स्थापना लगभग वर्ष 1990 में स्थानीय लोगों के सामूहिक सहयोग और चंदे से की गई थी। स्थापना के समय से ही यह मंदिर रामपुरहाट और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए अटूट श्रद्धा और विश्वास का केंद्र रहा है। यहाँ साल भर धार्मिक अनुष्ठान, कीर्तन और उत्सवों का आयोजन होता रहता था, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी भाग लेते थे।
विवाद की जड़ें तब गहरी हुईं जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए ‘भोगघर’ (प्रसाद गृह) का निर्माण शुरू किया गया। आरोप है कि उस समय सत्ता के रसूख का इस्तेमाल करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कुछ असामाजिक तत्वों ने निर्माण कार्य को बलपूर्वक रुकवा दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि न केवल निर्माण कार्य रोका गया, बल्कि निर्माणाधीन भोगघर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया। इसके बाद कथित तौर पर उस पवित्र स्थान को तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में तब्दील कर दिया गया, जहाँ से राजनीतिक गतिविधियां संचालित होने लगीं।
धार्मिक स्थल की संपत्ति का राजनीतिक उपयोग होने के कारण इलाके के लोगों में भारी आक्रोश था। लोग अपने आराध्य के भोगघर को पार्टी कार्यालय के रूप में देखकर आहत थे, लेकिन सत्ता के दबाव के कारण लंबे समय तक यह गुस्सा दबा रहा। श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सदस्यों ने कई बार इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन उनकी आवाज़ अनसुनी कर दी गई। यह मामला बीरभूम की राजनीति और सांप्रदायिक सौहार्द के बीच एक टीस की तरह बना हुआ था।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और भाजपा की सक्रियता के बाद इस मुद्दे ने दोबारा तूल पकड़ा। भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप के बाद उस भोगघर को टीएमसी के कब्जे से मुक्त कराया गया। रामपुरहाट शहर अध्यक्ष अर्पण नाग और जीएस विमान साहा जैसे प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में कब्जा हटाया गया और उस भवन को विधिवत रूप से दोबारा मंदिर समिति को सौंप दिया गया। इस दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद थे, जिन्होंने जयकारे लगाकर इस निर्णय का स्वागत किया।
भोगघर वापस मिलने से स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल को मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल की संपत्ति का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने इस जीत को ‘धर्म की जीत’ बताया है। समिति ने अब योजना बनाई है कि अधूरे पड़े निर्माण कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा और आने वाले समय में मंदिर की धार्मिक गतिविधियों का और अधिक विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखा जा सके।
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