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अयोध्या (thetarget365)। राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम इसी साल जनवरी में हुआ। ऐसे में भाजपा को पूरा विश्वास था कि उत्तर प्रदेश में तो आसानी से स्वीप कर जाएंगें, जनता का पूरा आशीर्वाद मिलेगा, इसी वजह से 80 की 80 सीटें जीतने का दावा भी किया जा रहा था। लेकिन जो नतीजे सामने निकल कर आये हैं उसने मोदी-योगी के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस से हाथ मिला समाजवादी पार्टी ने बड़े स्तर पर यूपी में सेंधमारी की है। सपा उन इलाकों में जीत के करीब पहुंच चुकी है जहां पर पिछले चुनाव तक भाजपा को बड़ी बढ़त मिली हुई थी।
पूरे देश के लिए राम मंदिर का मुद्दा बेहद अहम माना जा रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिहाज से कई सीटों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव था। फैजाबाद सहित गोंडा, कैसरगंज, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, बस्ती सीट पर भी राम मंदिर का काफी प्रभाव रहा है। यह सभी सीटें फैजाबाद के आसापास ही पड़ती हैं। ऐसे में माना जा रहा था यहां से भाजपा को ज्यादा चुनौती नहीं मिलेगी। लेकिन चुनावी नतीजों ने सभी हैरान कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि फैजाबाद सीट से भाजपा के लल्लू सिंह ही पिछड़ गए हैं। जिस अयोध्या को लगातार राम नगरी कहकर संबोधित किया गया, जहां पर सबसे ज्यादा भाजपा ने राम के नाम पर वोट मांगा, उसी सीट पर समाजवादी पार्टी आगे निकल गई।
लोकसभा चुनाव 2024 में हिंदुत्व का केंद्र बने रामनगरी अयोध्या में भाजपा की हार चौंकाने वाली है। तामझाम के साथ भव्य राम मंदिर निर्माण और तमाम विकास प्रोजेक्ट की बरसात का दावा बीजेपी ने किया था। यहां पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह को 48104 वोट से हरा दिया है।
भाजपा ने अयोध्या धाम के विकास पर सबसे ज्यादा फोकस किया। सोशल मीडिया से लेकर चुनाव-प्रचार में अयोध्या धाम में हुए विकास कार्यों को बताया गया लेकिन भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अयोध्या धाम से अलग ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर बिल्कुल विपरीत रही।
अयोध्या में रामपथ के निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया। कई लोगों के घर-दुकान तोड़े गए। पर वायदे के मुताबिक लोगों को मुआवजा नहीं मिला। इसकी नाराजगी चुनाव परिणाम में साफ नजर आ रही है। कुछ ऐसी ही स्थिति चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण में भी देखने को मिली। बड़ी संख्या में घर-दुकान तोड़े गए लेकिन प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं मिला।
बीजेपी ने सांसद लल्लू सिंह पर भरोसा जताते हुए तीसरी बार चुनावी मैदान में उतारा था। यहां लल्लू सिंह के खिलाफ स्थानीय लोगों को नाराजगी का अंदाजा पार्टी नहीं लगा पाई। नतीजतन बीजेपी को प्रतिष्ठित सीट गंवानी पड़ी। लल्लू सिंह ने चुनाव-प्रचार के दौरान संविधान बदलने का बयान भी दिया था। बयान पर काफी हंगामा भी मचा था।
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