Writers' Building Kolkata
Writers’ Building Kolkata : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद अब सरकार गठन की आधिकारिक घोषणा हो गई है। राज्य की नई सरकार आगामी 9 मई यानी बंगाली कैलेंडर के अनुसार ’25 बैशाख’ (रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती) के शुभ अवसर पर शपथ लेगी। सूत्रों के अनुसार, यह भव्य शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस स्थान का चयन भाजपा की उस मंशा को दर्शाता है, जहाँ वे अपनी जीत को जन-जन तक पहुँचाना चाहते हैं। प्रशासन और पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मेगा इवेंट के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
भाजपा ने सत्ता में आने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे प्रतीकों की राजनीति और परंपराओं को बहाल करने पर जोर देंगे। इसी क्रम में, पार्टी ने फैसला किया है कि बंगाल का शासन अब गंगा के उस पार स्थित ‘नबन्ना’ (हावड़ा) से नहीं, बल्कि कोलकाता की ऐतिहासिक ‘राइटर्स बिल्डिंग’ उर्फ ‘महाकरण’ से चलेगा। पिछले 10-12 वर्षों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नबन्ना से राज्य का संचालन कर रही थीं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वे बंगाल की गौरवशाली प्रशासनिक विरासत ‘राइटर्स’ को उसका पुराना सम्मान वापस दिलाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हमारी सरकार जनता के बीच से और ऐतिहासिक महाकरण से ही चलेगी।
नई सरकार के इस फैसले के बाद राइटर्स बिल्डिंग (महाकरण) में हलचल तेज हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) को पूरी इमारत का तकनीकी निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल इस बात पर मंथन जारी है कि मुख्यमंत्री का कक्ष कहाँ होगा और कैबिनेट के अन्य मंत्रियों के बैठने की व्यवस्था कैसे की जाएगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस और खुफिया विभाग के साथ उच्च स्तरीय बैठकें होने की संभावना है। खबर है कि राज्य के मुख्य सचिव स्वयं महाकरण का दौरा कर तैयारियों का जायजा ले सकते हैं। शुरुआती योजना के तहत बिल्डिंग के सामने वाले हिस्से को सबसे पहले कार्यशील बनाया जा रहा है ताकि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कामकाज शुरू हो सके।
बंगाल की जीत भाजपा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए कोलकाता आ रहे हैं। आमतौर पर शाह इस तरह की प्रक्रियाओं में व्यक्तिगत रूप से राज्यों में नहीं जाते, लेकिन बंगाल को एक ‘अपवाद’ माना जा रहा है। वे मंगलवार रात या बुधवार सुबह कोलकाता पहुँच सकते हैं। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे। शाह सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ गुप्त मतदान या चर्चा के जरिए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
महाकरण में केवल मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बैठने की जगह ही नहीं, बल्कि सुरक्षा घेरा और पुलिस पोस्ट की रूपरेखा भी नए सिरे से तैयार की जा रही है। भाजपा का मानना है कि नबन्ना से सरकार चलाना प्रतीकात्मक रूप से जनता से दूरी बनाना था, जबकि राइटर्स बिल्डिंग शहर के केंद्र में है और बंगाल की पहचान से जुड़ी है। जैसे-जैसे 9 मई की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे कोलकाता के डलहौजी इलाके में प्रशासनिक चहल-पहल बढ़ती जा रही है। बंगाल की जनता को अब उस पल का इंतजार है जब 25 बैशाख के दिन नई सरकार विधिवत रूप से कार्यभार संभालेगी और राइटर्स बिल्डिंग के गलियारे एक बार फिर फाइलों और सरकारी आदेशों की गूंज से जीवंत हो उठेंगे।
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