BJP Kerala: केरल की राजनीति में ‘लेफ्ट के अभेद्य दुर्ग’ माने जाने वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता हथियाने का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का सपना फिलहाल अधूरा रह गया है। एक महत्वपूर्ण वार्ड के उपचुनाव के नतीजों ने पार्टी को करारा झटका दिया है। नगर निगम की कुर्सी पर काबिज होने के लिए जिस बहुमत के आंकड़े की दरकार थी, पार्टी रणनीतिक रूप से उससे पीछे रह गई है। इस हार ने न केवल नगर निकाय के समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक सरगर्मी और कूटनीतिक उठापटक को भी तेज कर दिया है।
विझिंजम वार्ड का चुनावी दंगल: निर्दलीय प्रत्याशी की मौत के बाद हुआ मतदान
यह पूरा मामला विझिंजम वार्ड के उपचुनाव से संबंधित है। गौरतलब है कि मुख्य चुनावों के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार के आकस्मिक निधन के कारण इस वार्ड में मतदान टाल दिया गया था। सोमवार को हुए पुनर्मतदान के बाद जब परिणाम घोषित हुए, तो उन्होंने सबको चौंका दिया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के उम्मीदवार के.एच. सुधीर खान ने कड़े मुकाबले में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के एन. नौशाद को 83 वोटों के मामूली अंतर से पराजित कर दिया। यूडीएफ की इस जीत ने त्रिकोणीय मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है, जबकि एलडीएफ को अपने ही क्षेत्र में रक्षात्मक होना पड़ा है।
वोटों का गणित और सीटों का समीकरण: बीजेपी तीसरे स्थान पर फिसली
विझिंजम वार्ड के नतीजों पर नजर डालें तो यूडीएफ को कुल 2,902 वोट प्राप्त हुए, जबकि एलडीएफ के खाते में 2,819 वोट आए। बीजेपी के उम्मीदवार सर्वशक्तिपुरम बिनु 2,437 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। इस परिणाम के बाद 101 सदस्यीय नगर निगम परिषद में बीजेपी की सदस्य संख्या 50 पर ही अटक गई है। बहुमत का जादुई आंकड़ा 51 है, जिसे छूने के लिए अब बीजेपी को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की बैसाखी का सहारा लेना होगा। दूसरी ओर, यूडीएफ ने अपनी ताकत 19 से बढ़ाकर 20 कर ली है, जो 2015 की तुलना में दोगुनी प्रगति है। वहीं, सीपीआई के हाथ से एक और वार्ड निकल जाने के बाद एलडीएफ 29 सीटों पर सिमट गया है।
गृहमंत्री अमित शाह का केरल दौरा और जीत का बड़ा दावा
इस उपचुनाव के नतीजों से ठीक दो दिन पहले, रविवार (11 जनवरी, 2026) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तिरुवनंतपुरम में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। उन्होंने दावा किया था कि केरल में बीजेपी का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है और पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार बनाएगी। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बढ़ते उत्साह की सराहना की थी। हालांकि, विझिंजम के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केरल की जमीन पर अभी भी बीजेपी के लिए राह उतनी आसान नहीं है जितनी शीर्ष नेतृत्व को लग रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव और नगर निगम की भविष्य की राजनीति
तिरुवनंतपुरम नगर निगम का यह गतिरोध अब निर्दलीय पार्षदों को ‘किंगमेकर’ की भूमिका में ले आया है। बीजेपी के लिए बहुमत न मिल पाना एक मनोवैज्ञानिक हार की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी यहां अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी थी। एलडीएफ के लिए अपनी सीटों का कम होना आत्ममंथन का विषय है, जबकि यूडीएफ की बढ़ती सीटें राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी के संकेत दे रही हैं। आने वाले महीनों में केरल की राजनीति और भी अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है, जहां स्थानीय निकाय के ये परिणाम विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
















