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अंबिकापुर (thetarget365)। यह लड़ाई सरकार बनाने से कहीं आगे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की है। दो चरणों के मतदान के बाद यह साफ है कि जनता संविधान को बचाने की लड़ाई में इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है। चार सौ पार और मोदी की गारंटी को भाजपा भूल चुकी है। पहली बार ऐसा हुआ है कि विरोधी पार्टियां अपने मंच से हमारे घोषणा पत्र की बात कर रहे है। उक्त बातें एआईसीसी सचिव चंदन यादव ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं।
एआईसीसी सचिव चंदन यादव ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और फिर न्याय यात्रा से देश में नफरत कम हुई है। लोगो का भरोसा विकास की राजनीति पर बढ़ा है। यही बात भाजपा को पच नहीं रही। भाजपा देश को जाति-धर्म, खान-पान, पहनावा, रीति-रिवाज, बोली-भाषा के आधार पर तोड़ना चाहती है।संविधान उन्हें इसकी इजाजत नही देता। भाजपा और आरएसएस की मूल विचारधारा संविधान की प्रस्तावना से टकराती है। इसलिए ये संविधान बदलने की बात कहते हैं। ये नई बात नहीं है। अटल बिहारी बाजपेयी ने जस्टिस वेंकटचलैया की अध्यक्षता में संविधान की समीक्षा के लिए कमेटी बनाया था। यादव ने कहा यदि संविधान खत्म हो गया तो दलितों, आदिवासियों, पिछड़ा वर्ग सहित बहुसंख्यक आबादी के हितों का संरक्षण खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री अपने दोस्तों को देश की सारी संपत्ति सौंप देंगे। 10 साल सरकार चलाने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी अपने कामों पर वोट मांगने की स्थिति में नहीं है। भय भूख और भ्रष्टाचार चरम पर है, मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ा है। यह सरकार चंद पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ माफ कर सकती है मगर किसानों को समर्थन मूल्य नहीं दे पाती। कांग्रेस पार्टी किसानों को एमएसपी, युवाओं को रोजगार, महिलाओं को हर साल एक लाख रुपये देने का वादा किया है। उन्हें पूंजीपतियों की चिंता है हमने सबकी भागीदारी का वादा किया है। कांग्रेस के घोषणा पत्र से भाजपा घबराई हुई है इसलिए प्रधानमंत्री खुद मोदी की गारंटी को भूल गए हैं वह लोगों को झूठ और भावनात्मक भाषण से बरगला कर वोट हासिल करना चाहते हैं। देश की जनता इस बार बहकावे में नही आएगी।
आचार संहिता के उल्लंघन के सवाल पर उन्होंने कहा कोरिया जिले में धार्मिक कार्यक्रम का राजनीतिकरण करने पर चुनाव आयोग ने वहां की प्रत्याशी को नोटिस दिया है। प्रधानमंत्री को भी नफरत की भाषण के लिए नोटिस जारी किया गया है।बीजेपी धार्मिक गुरु का राजनैतिक इस्तेमाल करती है। सरगुजा में चिंतामणि कोई चुनौती नहीं है, भाजपा के लोग कल तक उन्हें भ्रष्टाचारी बताते थे, आज जब उनके लिए वोट मांगने जाते हैं तो जनता उनसे सवाल करती है। यही कारण है कि भाजपा के बड़े नेता उनके चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं।
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