Ambikapur News : भारतीय जनता पार्टी की नगर मंडल अंबिकापुर इकाई इन दिनों ठहराव की स्थिति से गुजर रही है। पार्टी ने शहर में संगठनात्मक मजबूती और व्यवस्थित संचालन के लिए पहली बार नगर को उत्तर और दक्षिण—दो हिस्सों में विभाजित कर मंडल अध्यक्ष नियुक्त किए थे। इस निर्णय को स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा और अवसर के रूप में देखा गया था। लेकिन नौ माह बीत जाने के बाद भी दोनों मंडलों की कार्यकारिणी का गठन न हो पाने से कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं।

अंबिकापुर शहर उत्तर के लिए मनोज कंसारी और दक्षिण के लिए कमलेश तिवारी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के बाद नगर निगम और जिला पंचायत/जनपद चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं, लेकिन कार्यकारिणी विस्तार अब तक अधर में लटका हुआ है। इसका असर संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर साफ दिखाई दे रहा है। नियमित बैठकें न होने से कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय कमजोर हो रहा है और संगठनात्मक गतिविधियाँ केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं।

स्थानीय स्तर पर सड़क, बिजली और शासकीय चिकित्सालय की व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर मंडल कार्यकारिणी होती तो इन विषयों पर प्रस्ताव पारित कर जनहित से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख और समाधानकारक पहल सामने आ सकती थी। यही नहीं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन, एल्डरमैन नियुक्ति, जनभागीदारी समितियों की सक्रियता तथा जेल संदर्शक जैसी जिम्मेदारियों को लेकर भी कार्यकर्ताओं में अपेक्षाएँ हैं। लेकिन कार्यकारिणी न बनने से इन मामलों में प्रदेश स्तर पर निर्णय लंबित पड़े हैं।
अंबिकापुर नगर मंडल छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए हमेशा अहम रहा है। यहां की गतिविधियों का असर न केवल शहर बल्कि पूरे सरगुजा संभाग की राजनीति पर पड़ता है। ऐसे में संगठनात्मक विस्तार में देरी पार्टी के लिए नकारात्मक संदेश दे सकती है।
फिलहाल कार्यकर्ताओं की निगाहें जिला और प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस ठहरे हुए मसले को कब गति देते हैं। अगर समय रहते संगठन को मजबूती नहीं दी गई तो इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।












