BJP Office Trees
BJP Office Trees: हरियाणा के करनाल जिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक नए कार्यालय तक पहुँचने के लिए सड़क बनाने के नाम पर 40 पुराने और परिपक्व पेड़ों को काट दिए जाने की घटना पर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर्यावरणीय क्षति को “दर्दनाक” बताते हुए अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। गुरुवार को, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न केवल हरियाणा सरकार बल्कि उसके शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) को भी अंतिम फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि इस गंभीर मामले में तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, क्योंकि राज्य प्रशासन की यह सीधी जिम्मेदारी बनती है कि वह पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
यह संवेदनशील मामला गुरुवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लाने वाले याचिकाकर्ता एक पूर्व आर्मी मैन हैं, जिन्होंने देश के लिए 1971 के युद्ध में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने सबसे पहले इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने दो प्रमुख आरोपों पर केस फाइल किया था: एक आवासीय क्षेत्र (रेजिडेंशियल एरिया) में बीजेपी पार्टी कार्यालय के लिए जमीन का आवंटन। पार्टी कार्यालय तक सड़क बनाने के लिए ग्रीन एरिया में 40 पेड़ों की अंधाधुंध कटाई।हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के विपरीत बिल्कुल उल्टा और सख्त रवैया अपनाया। जजों की बेंच ने हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए वकील विक्रमजीत बनर्जी से सीधे सवाल किए। कोर्ट ने टिप्पणी की, “यह दर्दनाक है… आपने पुराने पेड़ काट दिए! आपने पेड़ों का क्या किया और क्यों किया? इस घटना के लिए आपका क्या एक्सप्लेनेशन है?” अदालत ने यहां तक पूछ लिया कि राजनीतिक पार्टी के कार्यालय को कहीं और क्यों नहीं ले जाया जा सकता।
जवाब में, वकील बनर्जी ने दावा किया कि जमीन आवंटित करने के लिए जरूरी परमिशन ली गई थी और सभी ग्रीन नॉर्म्स (पर्यावरण मानकों) का पालन किया गया था। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जितने पेड़ काटे गए हैं, उतने ही पेड़ नए लगाए जाएंगे। इस पर, बेंच ने पलटवार करते हुए तल्ख सवाल किया, “40 पुराने, परिपक्व पेड़ों का हर्जाना कौन देगा? इसका मूल्य नए पौधे लगाने से पूरा नहीं हो सकता।”
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में हरियाणा राज्य सरकार और उसके प्रशासन को सख्त चेतावनी दी। जजों की बेंच ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में राज्य और उसका एडमिनिस्ट्रेशन जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर है। अदालत ने जोर दिया कि सरकार को केवल लीपापोती करने के बजाय इस पर्यावरणीय क्षति के लिए एक सही और संतोषजनक एक्सप्लेनेशन लेकर आना होगा।
सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा राज्य सरकार को इस गंभीर विषय पर एक्शन लेने के कई स्पष्ट आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार जल्द ही ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो कोर्ट सख्त एक्शन लेने के लिए बाध्य होगा। यह फैसला दर्शाता है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले विकास कार्यों के लिए अब प्रशासनिक और राजनीतिक संस्थाओं को सीधे जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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