BMC Election 2026
BMC Election 2026: देश की सबसे अमीर नगर निगम, मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। पिछले ढाई दशकों से अविभाजित शिवसेना का इस निकाय पर एकछत्र राज रहा था, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उस किले को ढहा दिया है। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी 227 सीटों में से 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का 25 साल का शासन समाप्त हो गया है। बीजेपी की इस सफलता ने न केवल मुंबई की राजनीति, बल्कि राज्य की सत्ता के समीकरणों को भी पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।
चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद ही मुंबई में ‘होटल पॉलिटिक्स’ की वापसी हो गई है। मेयर पद के चुनाव में किसी भी तरह की सेंधमारी या क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आक्रामक रुख अपना लिया है। शिंदे गुट के सभी निर्वाचित नगरसेवकों को आज दोपहर 4 बजे तक बांद्रा स्थित ‘ताज लैंड्स एंड’ होटल पहुंचने का सख्त आदेश दिया गया है। आधिकारिक तौर पर इसे एक बैठक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पार्षदों की घेराबंदी (Fencing) करने की कवायद है। सत्ता की चाबी अपने पास रखने के लिए शिंदे गुट अपने विधायकों को एकजुट रखने की हर संभव कोशिश कर रहा है।
मुंबई महानगरपालिका की 227 सीटों में से महायुति (गठबंधन) ने कुल 118 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के आंकड़े के करीब है। इसमें बीजेपी की 89 सीटों के साथ-साथ एकनाथ शिंदे की पार्टी की 29 सीटें भी शामिल हैं। चूंकि बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने में शिंदे गुट की भूमिका निर्णायक रही है, इसलिए मुख्यमंत्री शिंदे की ‘बारगेनिंग पावर’ काफी बढ़ गई है। अब सारा सस्पेंस इस बात पर टिका है कि मुंबई का अगला महापौर कौन होगा। बीजेपी जहां सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते अपने मेयर पर अड़ी है, वहीं शिंदे गुट भी इस पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।
महापौर पद को लेकर महायुति के भीतर खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि मुंबई का अगला मेयर ‘हिंदू मराठी’ चेहरा होगा, जो बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के सामने प्रस्ताव रखा है कि महापौर का पद ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के लिए दोनों पार्टियों के बीच साझा किया जाए। हालांकि, बीजेपी नेतृत्व ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति नहीं जताई है। 89 सीटें जीतने वाली बीजेपी का तर्क है कि जनता ने उन्हें सबसे ज्यादा जनादेश दिया है, इसलिए पहला मेयर उन्हीं का होना चाहिए। अब सबकी नजरें आगामी लॉटरी और गठबंधन की बैठकों पर टिकी हैं।
मुंबई के शोर के बीच महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति से भी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव 5 फरवरी को होने जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में देखने को मिल रहा है। अजित पवार और शरद पवार के गुट, जो राज्य स्तर पर अलग-अलग राहों पर हैं, वे जिला परिषद का चुनाव मिलकर लड़ेंगे। इन चुनावों के लिए मतदान 5 फरवरी को होगा और 7 फरवरी को मतगणना की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रामीण इलाकों में ‘पवारों’ की यह एकजुटता महायुति के लिए कितनी बड़ी चुनौती पेश करती है।
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