BMC Election
BMC Election 2026: मुंबई महानगर पालिका (BMC) के आगामी चुनावों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। लंबे समय से चल रही खींचतान और बैठकों के दौर के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग पर मुहर लग गई है। देश की सबसे अमीर महानगर पालिका पर कब्जे के लिए महायुति के दो प्रमुख घटक दलों ने अपनी रणनीति साझा कर दी है।
मुंबई की सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए बीजेपी और शिवसेना ने अपनी एकजुटता दिखाई है। कुल 227 वार्डों वाली बीएमसी में बीजेपी 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सीटों के इस बंटवारे ने स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी इस बार ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी तय की गई है, जिससे पहले दोनों दल अपने सभी उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट कर देंगे।
एक ओर जहाँ बीजेपी और शिवसेना साथ आए हैं, वहीं महायुति का तीसरा बड़ा घटक—अजित पवार की एनसीपी—मुंबई में अलग राह पर चल रही है। एनसीपी ने महायुति के साथ न जाकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी ने रविवार को अपनी पहली सूची में 37 उम्मीदवारों की घोषणा की थी, जिसके बाद सोमवार को 27 और नामों का ऐलान किया गया। अब तक एनसीपी कुल 64 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है, जिससे मुंबई का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है।
सीट शेयरिंग फाइनल होते ही बीजेपी ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों की पहली आधिकारिक सूची जारी कर दी। इस सूची में पार्टी ने अनुभव और युवा जोश का संतुलन बनाने की कोशिश की है। 2017 के चुनाव में जीत दर्ज करने वाले कई दिग्गज पार्षदों को पुनः मौका दिया गया है। पार्टी के राज्य मीडिया प्रमुख नवनाथ बान इस सूची में सबसे प्रमुख और युवा नाम बनकर उभरे हैं। वह शिवाजीनगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 135 से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
मुंबई समेत महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के लिए मतदान 15 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जबकि अगले ही दिन यानी 16 जनवरी को मतों की गणना होगी। इस बार बीएमसी में कुल 1 करोड़ 3 लाख 44 हजार 315 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आंकड़ों के अनुसार, मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 55.16 लाख (53%) और महिलाओं की संख्या 48.26 लाख (47%) है। इसके अलावा, 1099 मतदाता ‘अन्य’ श्रेणी से पंजीकृत हैं।
पिछले यानी 2017 के चुनावों पर नज़र डालें तो उस समय की अविभाजित शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि बीजेपी मात्र दो कदम पीछे 82 सीटों पर सिमट गई थी। हालांकि, पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में आए भूचाल के बाद समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। शिवसेना के 84 में से 46 पार्षद अब एकनाथ शिंदे के साथ हैं। इसके अलावा, अन्य दलों के कई पार्षदों ने भी बीजेपी और शिंदे गुट का दामन थाम लिया है, जिससे इस बार की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।
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