BMC Elections 2026
BMC Elections 2026: महाराष्ट्र की महायुति सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे अपने तीखे और विवादास्पद बयानों के लिए एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मुंबई के पास वसई में महानगरपालिका चुनाव के प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राणे ने अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने समुदाय विशेष को निशाना बनाते हुए कहा कि “कोई भी हरा सांप आपकी तरफ गंदी नजर से देख नहीं सकता।” राणे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आ गया है और विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नितेश राणे ने सभा में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार पूरी तरह हिंदुत्ववादी सोच वाली है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हिंदुओं के त्योहार में अगर कोई भी खलल डालने या मस्ती करने की कोशिश करेगा, तो वह अगले शुक्रवार को सरेंडर करने की स्थिति में भी नहीं रहेगा।” राणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूरी सरकार का हवाला देते हुए दावा किया कि अब हिंदुओं के पीछे एक ऐसी ताकत खड़ी है, जो किसी भी विरोधी को सिर उठाने की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने वसई के भावी मेयर को भी इसी विचारधारा से जोड़ने की वकालत की।
चुनाव प्रचार के दौरान राणे ने सीधे तौर पर धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की। उन्होंने मंच से कहा कि शहर का मेयर वही बनेगा जो “जय श्रीराम” का नारा लगाएगा। विवादास्पद टिप्पणी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि “आई लव मोहम्मद” कहने वालों या “सर तन से जुदा” की मानसिकता रखने वालों के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है और उन्हें सीमा पार उनके ‘अब्बा’ के पास भेज दिया जाएगा। राणे ने मतदाताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर “आई लव महादेव” वाली विचारधारा को जीत दिलाएं।
नितेश राणे केवल समुदाय विशेष तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने विपक्षी नेताओं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कुछ दिन पहले दिए गए अपने एक बयान को दोहराते हुए कहा कि ठाकरे भाइयों को वोट देने का सीधा अर्थ पाकिस्तान के हितों को बढ़ावा देना होगा। राणे के मुताबिक, मुंबई का मेयर केवल वही होना चाहिए जो मराठी हो और हिंदू हृदय सम्राट की विरासत को सही मायने में आगे बढ़ा सके। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यह “हिंदू राष्ट्र” है और यहाँ किसी अन्य विचारधारा का प्रभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे ने इस तरह की बेतुकी और सांप्रदायिक बयानबाजी की है। पिछले कई महीनों से वे अपने भड़काऊ भाषणों के कारण कई बार कानूनी पचड़ों में भी फंस चुके हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महानगरपालिका चुनावों से ठीक पहले इस तरह की बयानबाजी का मकसद हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना और चुनाव को विकास के मुद्दों से हटाकर धार्मिक ध्रुवीकरण पर ले जाना है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और विपक्षी दल इस पर क्या कार्रवाई करते हैं और वसई की जनता इस आक्रामक राजनीति पर क्या रुख अपनाती है।
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