Bondi Beach Shooting
Bondi Beach Shooting: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बोंडी बीच पर यहूदियों के त्योहार के बीच सामूहिक गोलीबारी (Bondi Beach Shooting) करने वाली आतंकी बाप-बेटे की जोड़ी “इस्लामिक स्टेट (IS) की विचारधारा” से प्रेरित थी। यह संभावना खुद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार, 16 दिसंबर को व्यक्त की। यह भयावह घटना रविवार की शाम को हुई, जब साजिद अकरम और उनके बेटे नवीद अकरम ने इस प्रसिद्ध समुद्र तट पर यहूदी हनुक्का उत्सव को निशाना बनाकर गोलीबारी की और 15 निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों में 10 साल की बच्ची से लेकर 87 साल तक के बुजुर्ग शामिल थे।
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने इस हमले को आतंकवाद का यहूदी विरोधी कदम बताया है। हालांकि, हमलावरों की गहरी सोच और प्रेरणा के बारे में अब तक बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की गई थी। अब पीएम अल्बनीज ने मंगलवार को पहला स्पष्ट संकेत दिया कि इस आतंकी बाप-बेटे को सामूहिक हत्या करने से पहले कट्टरपंथी बनाया गया था।
अल्बनीज ने इस घटना को इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि यह इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित था। वह विचारधारा जो एक दशक से भी अधिक समय से मौजूद है, जिसने नफरत की इस विचारधारा को जन्म दिया, और इस मामले में, सामूहिक हत्या में शामिल होने की तैयारी की गई।”
पीएम अल्बनीज ने एक बार फिर पुष्टि की कि 24 वर्षीय नवीद अकरम 2019 में ही ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी (ASIO) के ध्यान में आया था। उस समय उससे पूछताछ भी की गई थी, लेकिन उसे आने वाले वक्त के लिए खतरा नहीं माना गया था। प्रधानमंत्री ने बताया, “दूसरों के साथ जुड़ाव के कारण वह (नवीद) उनका ध्यान आकर्षित कर रहा था।” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिन लोगों से वह जुड़ा था, उनमें से दो पर आरोप लगाए गए और वे जेल गए, लेकिन उस समय नवीद को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में नहीं देखा गया था।
नवीद अकरम और उसके 50 वर्षीय पिता साजिद अकरम ने लंबी-नाली वाली बंदूकें लेकर समुद्र तट पर लोगों को 10 मिनट तक गोलियों से छलनी किया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 50 वर्षीय पिता साजिद अकरम को गोली मारकर मार गिराया गया। बेटे नवीद अकरम को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण वह वर्तमान में पुलिस सुरक्षा के तहत अस्पताल में कोमा में है। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती और चिंता का विषय बन गई है, खासकर युवाओं के कट्टरपंथी बनने की प्रवृत्ति को लेकर।
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