Boxing Federation of India : बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) में सत्ता संघर्ष गहरा गया है। फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार ने एक-दूसरे को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संविधान के उल्लंघन और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। इस टकराव के बीच 28 अक्टूबर को प्रस्तावित विशेष आम बैठक (SGM) और अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अजय सिंह ने प्रमोद कुमार को क्यों किया सस्पेंड?
अजय सिंह ने मंगलवार को प्रमोद कुमार को जांच पूरी होने तक अंतरिम रूप से निलंबित करने का आदेश दिया था। इसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और अधिकारों के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए। आदेश में कहा गया कि निलंबन अंतिम फैसला नहीं है और सक्षम अधिकारी के निर्णय तक लागू रह सकता है। सिंह ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप रद्द होने के मामले में भी कुमार से जवाब मांगे जाने का उल्लेख किया।
प्रसारण भुगतान विवाद से बढ़ा मामला
BFI के आदेश में पिनेकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस से जुड़े वित्तीय विवाद का भी जिक्र किया गया। आरोप के मुताबिक, कंपनी ने नवंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग फाइनल्स कप के प्रसारण के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये का दावा करते हुए नोटिस भेजे थे। कुमार के पहले के पत्र में कंपनी द्वारा आयोजन के प्रायोजन और प्रसारण के लिए दो करोड़ रुपये देने का वादा किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, कंपनी ने ऐसा कोई वादा करने से इनकार किया। सिंह ने इस मामले में संबंधित पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए।
वर्क ऑर्डर और चैंपियनशिप रद्द होने की जांच
सिंह की ओर से जारी आदेश में यह भी आरोप लगाया गया कि कुमार के हस्ताक्षर वाला एक वर्क ऑर्डर वित्त समिति की मंजूरी के बिना जारी हुआ था। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक प्रस्तावित एलीट पुरुष और महिला ओपन बॉक्सिंग चैंपियनशिप रद्द होने की जांच का मुद्दा उठाया गया। 17 अगस्त को जांच समिति गठित किए जाने के बाद कुमार पर कथित तौर पर जवाब देने में देरी करने और अतिरिक्त समय मांगने के आरोप लगाए गए।
प्रमोद कुमार ने अजय सिंह को किया निलंबित
बुधवार को प्रमोद कुमार ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अजय सिंह के निलंबन का आदेश जारी किया। कुमार के अनुसार, सिंह को पहले आठ अक्टूबर को सीज-एंड-डेसिस्ट नोटिस दिया गया था, इसके बावजूद वह फेडरेशन के रोजमर्रा के कामकाज पर कार्यकारी नियंत्रण बनाए हुए थे। कुमार ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष BFI को निजी जागीर की तरह चला रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं कर रहे।
28 अक्टूबर की बैठक पर टिकी निगाहें
कुमार ने दावा किया कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए उन्हें अधिकांश संबद्ध राज्य इकाइयों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने सिंह पर जरूरी मंजूरी के बिना फैसले लेने, संविधान में अनधिकृत बदलाव की कोशिश करने और राज्य संघों को कार्रवाई की धमकी देने के आरोप भी लगाए। उनके आदेश के मुताबिक, सिंह का निलंबन 28 अक्टूबर की SGM में अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम मतदान होने तक या सक्षम आम सभा के नए आदेश तक लागू रहना था।
दोनों पक्षों के आदेशों से संवैधानिक विवाद गहराया
अजय सिंह ने अपने निलंबन को अनधिकृत बताते हुए कहा कि BFI का संविधान महासचिव को अध्यक्ष को स्वतंत्र रूप से निलंबित करने का अधिकार नहीं देता। दूसरी ओर, कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट के चुनाव संबंधी निर्देशों की कथित अनदेखी का आरोप लगाया। दोनों पक्ष अपने-अपने आदेशों को उचित ठहरा रहे हैं। अब विवाद का समाधान फेडरेशन के संविधान, संबंधित जांच और 28 अक्टूबर की बैठक में होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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