Brics Summit 2025 : ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिस्सा लेने पहुंचे। सम्मेलन के दौरान उन्होंने विकासशील देशों की उपेक्षा पर सवाल उठाया और “ग्लोबल साउथ” के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। मोदी ने कहा कि अगर वैश्विक समूहों में विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तो वे “सिम कार्ड के बिना मोबाइल” की तरह काम करेंगे।
ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी के भाषण के कुछ घंटों बाद ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य देशों पर अब अमेरिका में 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा। ट्रम्प ने ब्रिक्स को “अमेरिका विरोधी संगठन” करार दिया और साफ किया कि इस फैसले में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
ट्रम्प ने अपने पोस्ट में कहा, “ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़े देशों को अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। इसमें किसी को कोई रियायत नहीं दी जाएगी।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-सी नीतियां अमेरिका विरोधी मानी जा रही हैं। उनका यह बयान ब्रिक्स के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के प्रति अमेरिका की चिंता को दर्शाता है।
भारत लंबे समय से ब्रिक्स का प्रमुख सदस्य रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसने अमेरिका के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए हैं। इस सप्ताह नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार समझौते की संभावनाएं जताई जा रही थीं, जिससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैक्स कम हो सकता था। लेकिन ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन समझौतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनके ‘मित्रवत संबंधों’ के बावजूद भारत को कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप यदि फिर से राष्ट्रपति बने, तो उनकी व्यापार नीतियां कड़ाई पर आधारित होंगी और निजी रिश्ते उन पर असर नहीं डालेंगे।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के विस्तार और वैश्विक मुद्दों पर इसकी एकजुटता ने अमेरिका को चिंतित किया है। ट्रंप के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां अमेरिका वैश्विक मंचों पर अपने वर्चस्व को चुनौती देने वालों के प्रति सख्त रवैया अपना रहा है। ट्रम्प की घोषणा ने न केवल ब्रिक्स देशों को झटका दिया है, बल्कि भारत के लिए भी यह एक कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती बनकर उभरी है। अब देखना होगा कि अमेरिका और भारत के रिश्तों पर इसका क्या असर पड़ता है और ब्रिक्स इस सख्ती का जवाब किस तरह देता है।
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