Budget Session
Budget Session : लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आरोपों की कड़ी आलोचना की। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और सरकार की नीतियों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सीतारमण ने इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यापारिक समझौतों में देश के हितों का सौदा हमने नहीं, बल्कि कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में आपने सरेंडर किया था, हमने नहीं।” वित्त मंत्री ने सरकार की आर्थिक संप्रभुता का बचाव करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार देश के स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करती।
विपक्ष के उन आरोपों का जवाब देते हुए कि सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है, सीतारमण ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि देश में क्रेडिट (ऋण) की कोई कमी नहीं है और बैंकिंग व्यवस्था सुदृढ़ है। विशेष रूप से किसानों के लिए उन्होंने कहा कि फर्टिलाइजर (उर्वरक) सब्सिडी के लिए अलग से पर्याप्त बजट आवंटित किया गया है, ताकि बुवाई के सीजन में किसानों को किसी भी तरह की खाद की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने मछलीपालन और पशुपालन (एनिमल हस्बेंड्री) क्षेत्र के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
बजट में पश्चिम बंगाल की अनदेखी के आरोपों पर वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बंगाल सरकार के आरोपों को ‘निराधार’ बताते हुए कहा कि टीएमसी नेता जनता को गुमराह कर रहे हैं। सीतारमण ने तल्ख लहजे में कहा कि राज्य सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में डांट खाओगे, फिर कहोगे कि केंद्र सरकार कुछ नहीं दे रही है।” उन्होंने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की।
वित्त मंत्री ने ममता बनर्जी के उस विवादित बयान की भी कड़ी निंदा की जिसमें महिलाओं और लड़कियों को रात में बाहर न निकलने की सलाह दी गई थी। सीतारमण ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुधारने के बजाय महिलाओं पर दोष मढ़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ‘कट मनी’ का जिक्र करते हुए कहा कि टीएमसी नेताओं की कार्यशैली ही विकास में बाधक है। उन्होंने सवाल किया कि यदि केंद्र बंगाल को कुछ नहीं दे रहा, तो दिल्ली से कोलकाता तक पेट्रोल की सप्लाई और बुनियादी ढांचे का विकास कैसे संभव हो रहा है?
अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए वित्त मंत्री ने पुराने व्यापारिक केंद्रों (क्लस्टर्स) के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि दशकों पुराने उन 200 क्लस्टर्स को भी पुनर्जीवित करेगी जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की रीढ़ हैं। चाहे वो लुधियाना और जालंधर के होजरी उद्योग हों, कानपुर का लेदर बिजनेस हो या बिहार और बंगाल के पारंपरिक केंद्र, सरकार इन्हें आधुनिक उपकरण और फंड उपलब्ध कराएगी। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इन केंद्रों के अपग्रेडेशन से भारत के निर्यात (एक्सपोर्ट) की क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी होगी।
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