★ कंडम खटारा बसे सड़क पर ताबूत की तरह चल रही हैं
★ अंबिकापुर से चलने वाली अधिकतर बसे परिवहन विभाग के रहमोकरम पर बगैर परमिट सड़क पर
बतौली (सरगुजा)। बतौली-बगीचा चौक में गुरुवार को दोपहर में राजधानी बस के ब्रेकफेल होने से बड़ी दुर्घटना टल गई। अंबिकापुर से कांसाबेल जाने वाली राजधानी बस क्रमांक सीजी 15 ए 3296 बगीचा चौक में आकर खड़ी होकर सवारी उतारने और चढ़ाने के बाद जैसे ही बगीचा जाने के लिए स्टार्ट हुई, पीछे की ओर लुढ़कने लगी।ऐसा समझा जाता है कि स्टार्ट होने के बाद बस में गियर नही लगा और लुढ़कने लगा। बस ड्राइवर ने ब्रेक लगाने का प्रयास किया परन्तु ब्रेक नही लगा और बस राष्ट्रीय राज्य मार्ग 43 को पार करते हुए स्टेशनरी दुकान राकेश अग्रवाल के दुकान से सटे नाली में फंस कर रुक गयी। इस घटना से दुकान को कोई नुकसान नही हुआ और न किसी को चोट आई।
टली दुर्घटना
बस के इस तरह से ब्रेकफेल होने से एक बड़ी दुर्घटना टल गई।साप्ताहिक बाजार का दिन होने से भारी भीड़ रहती है। सुबह और दोपहर का समय होने के कारण ज्यादा भीड़ नही थी। वही राष्ट्रीय राज्यमार्ग 43 में आवागमन बहुत रहता है। निजी कार, बस, ट्रकों की आवाजाही लगातार लगी रहती है। बस जब पीछे से लुढ़कते हुए राष्ट्रीय राज्य मार्ग को पार कर रही थी उस समय कोई भी वाहन या दुपहिया वाहन के साथ व्यक्ति पीछे नही था। इससे बड़ी दुर्घटना टल गई। प्रत्यक्षदर्शी अंकित अग्रवाल और राकेश अग्रवाल ने बताया कि लुढ़कते हुए बस की गति काफी तेज थी। कोई वाहन या व्यक्ति चपेट में आता तो बचना मुश्किल था।
बस स्टैंड में नही करते बस खड़ी, हमेशा लगता है जाम
बगीचा चौक में ही बस स्टैंड है, परन्तु बस ड्राइवर बसों को बस स्टैंड में खड़ी नही करते हैं। बगीचा चौक में ही सड़क किनारे बस खड़ी करते हैं इससे हर समय जाम लगी रहती है। इस सम्बंध में प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया गया था। पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने भी व्यक्तिगत संज्ञान लेते हुए आदेश पारित किया था परन्तु फिर भी सड़क किनारे बस खड़ी करने पर रोक नही लग सकी है। पुलिस के दो कर्मचारियों की ड्यूटी बस स्टैंड में लगी रहती है परन्तु यह पर्याप्त नही दिख रहा। खबर छपने के दो तीन दिन ठीक रहा पर फिर वही ढर्रा से काम होने लगा।
कई बसे कबाड़, सड़क में चलने लायक नहीं
अंबिकापुर से सीतापुर, बगीचा की ओर चलने वाली कई बसे कंडम हो गई हैं। किसी के गियर नही लगते तो किसी के ब्रेक नही लगते हैं। कई बसों के खिड़की में शीशे नही रहते हैं। सीट की हालत भी खराब हो गई है। कई बसे आउट डेटेट हो गई हैं फिर भी सड़क पर दौड़ रही हैं जो चलते हुए आवाज भी ज्यादा करती हैं।