Caste Census 2027
Caste Census 2027: देश में होने वाली आगामी जनगणना और जाति गणना को लेकर राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने जनगणना 2027 की प्रक्रिया और सरकार द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली पर कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्य विपक्षी दल का आरोप है कि केंद्र सरकार की मंशा इस जटिल प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि जनगणना का विवरण अंतिम रूप देने से पहले सरकार को सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्ययोजना पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, जो मुख्य रूप से हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना पर केंद्रित होगा। वहीं, दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना की शुरुआत सितंबर 2026 में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों से होगी। शेष भारत में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में शुरू की जाएगी। कांग्रेस का कहना है कि इन चरणों के विवरण में पारदर्शिता का अभाव है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर ‘यू-टर्न’ लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने याद दिलाया कि 30 अप्रैल 2025 तक सरकार जाति गणना के विचार को लगातार खारिज करती रही थी। कांग्रेस के अनुसार, 2021 में सरकार ने लोकसभा और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह हलफनामा देकर इसे टालने की कोशिश की थी। यहाँ तक कि अप्रैल 2024 में प्रधानमंत्री ने इस मांग को ‘अर्बन नक्सल’ मानसिकता से प्रेरित बताया था। कांग्रेस का दावा है कि उनके निरंतर दबाव के कारण ही अंततः 12 दिसंबर 2025 को सरकार को झुकना पड़ा और इसे फेज-2 में शामिल करने की घोषणा करनी पड़ी।
कांग्रेस ने सरकार द्वारा अधिसूचित हाउस-लिस्टिंग विषयों की सूची, विशेषकर प्रश्न संख्या 12 पर गंभीर आपत्ति जताई है। जयराम रमेश के अनुसार, इस प्रश्न में केवल यह पूछा गया है कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या ‘अन्य’ श्रेणी से है। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में देशव्यापी जाति जनगणना के प्रति प्रतिबद्ध है, तो ओबीसी श्रेणी को प्रश्नावली में स्पष्ट स्थान क्यों नहीं दिया गया? यह विसंगति सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करती है।
पार्टी ने मांग की है कि प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों के साथ अनिवार्य रूप से संवाद किया जाए। कांग्रेस ने 2025 में तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए ‘SEEEPC’ सर्वे का उदाहरण दिया। पार्टी का मानना है कि शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक सहभागिता के आधार पर जानकारी जुटाने का यह सबसे सटीक तरीका है। कांग्रेस के अनुसार, केवल इसी तरह के व्यापक सर्वे से ही देश में आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।
कांग्रेस का स्पष्ट स्टैंड है कि जाति जनगणना केवल एक सांख्यिकीय कवायद नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को इसे “गुपचुप” तरीके से लागू करने के बजाय एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। प्रश्नावली में सुधार और सभी वर्गों का स्पष्ट प्रतिनिधित्व ही इस जनगणना को सफल और विश्वसनीय बना सकता है। आगामी दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक गरमाने के आसार हैं।
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