CEC Gyanesh Kumar Impeachment Notice : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब पूर्व नौकरशाहों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने भी सवाल उठाए हैं। सोमवार, 5 अक्टूबर को समूह की ओर से ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस जारी किया गया। इसमें निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर ज्ञानेश कुमार पर छह आरोप लगाए गए हैं। समूह ने इन आरोपों के आधार पर उनके इस्तीफे और पद से हटाने की मांग की है।
कई पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता समूह में शामिल
‘जनता का महाभियोग’ अभियान से जुड़े समूह में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता योगेंद्र यादव सहित कई पूर्व अधिकारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। समूह ने अपने नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का उल्लेख करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग रखी है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोप समूह के दावे हैं और इन्हें अपने आप में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचने से रोकने का दावा
समूह के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वे अपना नोटिस निर्वाचन आयोग के कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां पहुंचने की अनुमति नहीं मिली। उनके अनुसार, निर्वाचन सदन की ओर जाने वाले रास्तों पर पहले से बैरिकेडिंग कर दी गई थी। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने दावा किया कि अधिकारियों को प्रतिनिधिमंडल के आने की जानकारी पहले से थी। उन्होंने इन पाबंदियों को कानून और संविधान से जुड़े अधिकारों के खिलाफ बताया।
SIR के फैसलों की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
चार पन्नों के इस नोटिस में निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। समूह का आरोप है कि SIR समेत कुछ महत्वपूर्ण फैसले पर्याप्त चर्चा, सलाह-मशविरे और औपचारिक रूप से दर्ज कार्यवाही के बिना लिए गए। नोटिस में दो निर्वाचन आयुक्तों की कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। समूह का दावा है कि इन आपत्तियों में आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
Form-6 को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
नोटिस में Form-6 से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। समूह का आरोप है कि इसकी वैधता को लेकर आंतरिक स्तर पर सवाल उठने के बावजूद फॉर्म के बदले हुए संस्करण का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पहले से मतदाता सूची में शामिल लोगों से एक घोषणा लेने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया गया है। समूह के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए, उनसे नए मतदाता की तरह घोषणा मांगना उचित प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा है।
ECINET व्यवस्था पर भी सवाल
पूर्व अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ECINET को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि इस व्यवस्था ने चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की वैधानिक भूमिका को प्रभावित या कमजोर किया है। ये अधिकारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और जरूरी सुधार करने जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। समूह ने दावा किया कि चुनावी प्रशासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्रीकरण से अधिकारियों की निर्धारित भूमिका और अधिकारों को लेकर सवाल पैदा हुए हैं।
मतदाता अधिकारों को लेकर चिंता
नोटिस में SIR की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। समूह का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। इसी आधार पर समूह ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग SIR को लेकर विपक्ष तथा अन्य पक्षों की ओर से लगाए गए अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करता रहा है।
छह आरोपों के आधार पर कार्रवाई की मांग
‘जनता का महाभियोग’ नोटिस में कुल छह प्रमुख आरोपों के आधार पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इनमें आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR, Form-6, ECINET और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। समूह का कहना है कि इन मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
SIR विवाद के बीच बढ़ी सियासी हलचल
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूर्व नौकरशाहों का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब SIR को लेकर राजनीतिक विवाद पहले से जारी है। विपक्षी दल भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब पूर्व अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नोटिस के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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