CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायालय के आदेश का समय पर पालन नहीं होने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सरगुजा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत IAS को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कलेक्टर से पूछा है कि न्यायालयीन आदेश के अनुपालन में देरी के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामला 78 वर्षीय विधवा बी. एक्का के दिवंगत पति से जुड़े लंबित सेवा और पेंशन लाभों का है।


78 वर्षीय विधवा के मामले में कार्रवाई
बी. एक्का ने अपने दिवंगत पति के लंबित सेवा लाभ और पेंशन से संबंधित दावों के निपटारे की मांग की थी। हाई कोर्ट ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को मामले पर तय समय में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि आदेश जारी होने के बावजूद उनके मामले का अभी तक पूरी तरह निराकरण नहीं किया गया है। इसी दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कलेक्टर को नोटिस जारी किया।

छह जनवरी के आदेश में 60 दिन की समय सीमा
मूल मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को बी. एक्का के दावे पर कानून और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने को कहा था। आदेश में दिवंगत पति के Revised Pay Scale, Time Pay Scale, क्रमोन्नति की बकाया राशि और पेंशन के पुनर्निर्धारण सहित अन्य परिणामी लाभों पर निर्णय लेने की बात कही गई थी।
बुजुर्ग महिला की उम्र को देखते हुए जल्द कार्रवाई का निर्देश
हाई कोर्ट ने मूल आदेश में याचिकाकर्ता की अधिक उम्र को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा था। 78 वर्षीय महिला होने के कारण अदालत ने मामले का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में दावे का पूर्ण समाधान नहीं होने की शिकायत सामने आई। अब यह मामला सिर्फ सेवा और पेंशन लाभों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायालय के निर्देशों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी बन गया है।
आदेश के बाद भी जारी रहा विभागीय पत्राचार
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बी. एक्का ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन देकर न्यायालय के आदेश का पालन करने और लंबित लाभ दिलाने की मांग की। इसके बाद 11 मई 2026 को आयुक्त, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर ने कलेक्टर को पत्र भेजकर हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने और परिणामी लाभ देने को कहा था।

दस्तावेज जमा करने के बाद भी नहीं मिला पूरा लाभ
इसके बाद 21 मई 2026 को अपर कलेक्टर की ओर से पेंशन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए बी. एक्का से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। याचिकाकर्ता ने चार पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रतियां समेत मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। हालांकि, उनके अनुसार इसके बावजूद पेंशन का पूर्ण पुनर्निर्धारण, बकाया भुगतान और अन्य परिणामी सेवा लाभ अब तक नहीं मिल सके हैं।
अवमानना याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा मामला
निर्धारित समय सीमा में आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने के बाद बी. एक्का ने अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि संबंधित अधिकारियों को हाई कोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी थी। आदेश के बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार भी हुआ और आवश्यक दस्तावेज भी प्राप्त किए गए, फिर भी अंतिम निर्णय लेकर आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया।
कलेक्टर से पांच सप्ताह में मांगा गया जवाब
अवमानना याचिका पर सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। अब कलेक्टर को अगली सुनवाई से पहले अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन में देरी को गंभीरता से देखा जा रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर भी टिकी निगाहें
इस मामले में अब अदालत के सामने मुख्य सवाल केवल पेंशन और सेवा लाभों के भुगतान का नहीं है, बल्कि यह भी है कि न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। खास तौर पर जब अदालत ने बुजुर्ग याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया था। आगामी सुनवाई में कलेक्टर के जवाब और प्रशासन की कार्रवाई से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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