CG Somnath Swabhiman Yatra : छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देने और भारतीय संस्कृति के साथ जन-जन का जुड़ाव और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष पहल की शुरुआत की गई है। सोमवार, 22 जून को रायपुर रेलवे स्टेशन से “सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा” को भव्य रूप से रवाना किया गया। इस यात्रा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 1000 विशिष्टजन, जो अपनी-अपनी विधाओं और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं, विशेष ट्रेन द्वारा गुजरात के पावन सोमनाथ धाम की तीर्थ यात्रा के लिए निकले हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर इस विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा 22 जून से शुरू होकर 26 जून तक पांच दिनों तक संचालित होगी, जिसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से चयनित प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान को नई दिशा देने की अनूठी पहल
“सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा” को केवल एक तीर्थ यात्रा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अटूट आस्था और राष्ट्रीय गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में चलाए जा रहे व्यापक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का एक प्रमुख हिस्सा है। इस यात्रा का मुख्य ध्येय छत्तीसगढ़ के निवासियों को देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और उन राष्ट्रीय मूल्यों से गहराई से परिचित कराना है, जिन्होंने भारत को विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान दी है। यह यात्रा राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देती है।

छत्तीसगढ़ी अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव का संगम
इस यात्रा में शामिल होने वाले 1000 प्रतिभागियों का चयन प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से किया गया है, जिसमें साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और संस्कृति प्रेमी शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय गौरव के साथ जोड़ने का एक माध्यम भी है। सोमनाथ, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम माना जाता है, भारतीय स्वाभिमान और पुनरुत्थान का प्रतीक है। इस तीर्थ स्थल तक की यात्रा प्रतिभागियों को न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगी, बल्कि उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना को भी प्रबल करेगी।
पांच दिनों तक चलेगी सांस्कृतिक चेतना की यह विशेष यात्रा
22 जून से 26 जून तक चलने वाली यह पांच दिवसीय यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को सोमनाथ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का प्रयास है कि इस प्रकार के आयोजनों से देश के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को भी राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ा जाए। छत्तीसगढ़ के ये विशिष्टजन जब वापस लौटेंगे, तो वे अपने साथ सोमनाथ के वैभव और राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का संदेश लेकर आएंगे। राज्य सरकार द्वारा इस यात्रा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं ताकि प्रतिभागियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और वे अपनी यात्रा का पूरा लाभ उठा सकें। यह प्रयास भविष्य में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
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