CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में हुए भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के बेटे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, बजरंग स्पात कंपनी के निदेशक के पुत्र, शशांक गोयल और भूमिका कटियार को जमानत दे दी है। ये सभी पिछले कई महीनों से रायपुर जेल में न्यायिक हिरासत में थे।
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, सिद्धार्थ अग्रवाल और शशांक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी। अदालत ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए मामले की आगे की सुनवाई के लिए शर्तों के साथ रिहाई की अनुमति दी।
बीजेपी ने लंबे समय से CGPSC भर्ती में धांधली के आरोप लगाते हुए तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार पर सवाल उठाए थे। पार्टी का आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया में कई पदाधिकारियों ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया।
सत्तारूढ़ पार्टी के विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते बीजेपी ने यह भी वादा किया था कि सत्ता में आने पर सीबीआई जांच कराई जाएगी। सरकार बनने के बाद जांच एजेंसियों ने इस मामले में टामन सिंह सोनवानी समेत कई अधिकारियों और नेताओं के करीबी रिश्तेदारों को आरोपी बनाया।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक, ललित गणवीर और अन्य कई अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि इन अधिकारियों ने परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक कर अपने रिश्तेदारों और परिचितों को अनुचित लाभ दिया।
इनमें से कई उम्मीदवार बाद में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त हुए। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी ने अपने भतीजों और परिचितों को लाभ देने के लिए नियमों में जानबूझकर संशोधन और बदलाव किया।
राज्य सरकार ने फरवरी 2024 में इस मामले को सीबीआई के हवाले किया। इससे पहले जुलाई 2023 में सीबीआई ने 2020 से 2022 के बीच हुई CGPSC परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की जांच शुरू की थी। जांच में शामिल दस्तावेज़ और गवाहों के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि चयन प्रक्रिया में कई नियमों का उल्लंघन हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को जमानत देते हुए उन्हें मुख्य सुनवाई तक अदालत में उपस्थित रहने की शर्त के साथ रिहा किया है। अब यह देखना होगा कि जांच में आगे कौन-कौन से अधिकारी और उम्मीदवारों पर कार्रवाई होती है।
यह मामला छत्तीसगढ़ प्रशासन और PSC परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को फिर से उजागर करता है। आने वाले महीनों में अदालत की सुनवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस भ्रष्टाचार घोटाले की दिशा तय करेगी।
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