Chaitra Navratri 2024 Day 4
Chaitra Navratri 2024 Day 4: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 22 मार्च 2026 को नवरात्रि का चौथा दिन है, जो आदिस्वरूपा मां कूष्मांडा को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इन्हें सृष्टि की आदि-शक्ति कहा जाता है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की महिमा और इस दिन के विशेष रीति-रिवाजों के बारे में।
‘कूष्मांडा’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ ‘कुम्हड़ा’ (कद्दू या पेठा) होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को कुम्हड़े की बलि अत्यंत प्रिय है, जिसके कारण उनका नाम कूष्मांडा पड़ा। देवी का यह स्वरूप भव्य और तेजस्वी है। इनकी आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें ‘अष्टभुजा वाली’ देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं, जबकि आठवें हाथ में सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है, जो उनकी असीम ऊर्जा का प्रतीक है।
नवरात्रि के चौथे दिन रंगों का विशेष महत्व होता है। मां कूष्मांडा की पूजा के लिए नारंगी या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है। यह रंग उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक है। भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन देवी मां को भी पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करें। इसमें पीला सिंदूर, पीली चूड़ियां, पीली बिंदी और पीले फल शामिल हो सकते हैं। ऐसा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और साधक के जीवन में प्रकाश का संचार करती हैं।
मां कूष्मांडा को लाल रंग के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं। पूजा के दौरान माता रानी को लाल गुलाब या गुड़हल के फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इसके साथ ही, इस दिन एक विशेष मंत्र का 21 बार जाप करना फलदायी माना गया है:
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्त पद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ इस मंत्र के जाप से परिवार में खुशहाली आती है, यश और बल में वृद्धि होती है, तथा स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।
चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को उनके पसंदीदा पेठे (कुम्हड़ा) का भोग अवश्य लगाना चाहिए। इसके अलावा, माता को मालपुआ और हलवे का भोग लगाना भी अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि मालपुए का भोग लगाने से भक्त के जीवन में सदैव मिठास बनी रहती है और उसे देवी की अपार कृपा प्राप्त होती है। यह सात्विक भोग न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि देवी के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है।
नवरात्रि के चौथे दिन की साधना साधक के अनाहत चक्र को जागृत करने में सहायक होती है। मां कूष्मांडा की भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है। जो भक्त सच्चे मन से माता की उपासना करते हैं, उनके सभी रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं। सूर्यमंडल में निवास करने के कारण, माता अपने भक्तों को मानसिक शांति और तेज प्रदान करती हैं, जिससे वे कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनते हैं।
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