Chandrababu Naidu on Hanuman
Chandrababu Naidu on Hanuman: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में एक विज्ञान सम्मेलन के दौरान कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसने इंटरनेट की दुनिया में बहस और चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। नायडू का मानना है कि भारतीय महाकाव्यों, रामायण और महाभारत के पात्र हॉलीवुड के सुपरहीरोज से कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान हनुमान और अर्जुन की वीरता सुपरमैन और आयरन मैन जैसे पात्रों से कहीं बड़ी है, लेकिन वे केवल प्रचार (पब्लिसिटी) के मामले में पीछे रह गए हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और कई नेटिज़न्स इस पर चटखारे भी ले रहे हैं।
शुक्रवार को तिरुपति स्थित नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी में ‘इंडियन साइंस कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सभा को संबोधित किया। अपनी मातृभाषा तेलुगु में भाषण देते हुए उन्होंने भारतीय पौराणिक नायकों की तुलना आधुनिक हॉलीवुड सुपरहीरोज से की। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भगवान हनुमान की शक्ति सुपरमैन से कहीं अधिक है और अर्जुन की युद्ध कला आयरन मैन या बैटमैन से कहीं ज्यादा श्रेष्ठ थी। उनके इस बयान ने वहां मौजूद शिक्षाविदों और दर्शकों को हैरान कर दिया।
मुख्यमंत्री नायडू ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर माता-पिता और शिक्षकों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों और युवाओं को केवल पश्चिमी कहानियों और हॉलीवुड के काल्पनिक पात्रों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने अपील की कि नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महाकाव्यों से परिचित कराया जाना चाहिए। नायडू के अनुसार, भगवान राम नैतिकता और न्याय के सबसे बड़े प्रतीक हैं और उनका ‘राम राज्य’ सुशासन का दुनिया में सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कृष्ण और शिव की महानता का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी कहानियां हॉलीवुड की ‘अवतार’ जैसी फिल्मों से कहीं अधिक गहरी और सार्थक हैं।
जैसे ही मुख्यमंत्री के भाषण के अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुए, नेटिज़न्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। सबसे बड़ा सवाल जो लोगों ने उठाया वह यह था कि विज्ञान सम्मेलन (Science Conference) में राम, हनुमान और अर्जुन का विज्ञान से क्या संबंध है? एक यूज़र ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आखिरकार रामायण-महाभारत को विज्ञान मान ही लिया गया।” वहीं कुछ अन्य लोगों ने इसे पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। सोशल मीडिया पर एक वर्ग का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री केवल सांस्कृतिक गौरव की बात कर रहे थे, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम की एक खास बात यह भी थी कि नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी के इस मंच पर आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। राजनीतिक विश्लेषकों और कुछ आलोचकों का मानना है कि चंद्रबाबू नायडू का यह भाषण हिंदू प्रतीकों और महाकाव्यों की तारीफ की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने संघ प्रमुख की उपस्थिति के कारण जानबूझकर धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव पर जोर दिया। बहरहाल, विज्ञान के मंच से निकले इन पौराणिक उदाहरणों ने देश की राजनीति और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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