Chandrapur Municipal Election
Chandrapur Municipal Election : महाराष्ट्र की राजनीति में चंद्रपुर महानगरपालिका (मनपा) का आगामी महापौर चुनाव एक हाई-वोल्टेज ड्रामा बन चुका है। कांग्रेस पार्टी के दो कद्दावर नेताओं, विधायक विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच की गुटबाजी अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कड़ी मध्यस्थता और कोशिशों के बावजूद दोनों गुटों के बीच सुलह के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ताज़ा खबरों के मुताबिक, सांसद प्रतिभा धानोरकर 13 नगरसेवकों के साथ अपना अलग खेमा बना चुकी हैं, वहीं वडेट्टीवार के पास 14 नगरसेवकों का समर्थन है। इस फूट ने न केवल चंद्रपुर बल्कि नागपुर की राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है, जिससे कांग्रेस के हाथों से मनपा की सत्ता फिसलने का खतरा पैदा हो गया है।
शुक्रवार को मनपा में कांग्रेस गटनेता (Floor Leader) के पंजीयन को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे आपसी मतभेद की भेंट चढ़ गईं। विजय वडेट्टीवार ने गटनेता पद के लिए अनुभवी पार्षद वसंत देशमुख का नाम आगे बढ़ाया, तो दूसरी ओर सांसद प्रतिभा धानोरकर ने अपने करीबी पार्षद सुरेंद्र अड़बाले के नाम पर जोर दिया। एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं द्वारा अलग-अलग पार्षदों के नाम प्रस्तावित करने और एक-दूसरे के प्रस्तावों का कड़ा विरोध करने के कारण गुट का आधिकारिक पंजीयन नहीं हो सका। वडेट्टीवार हालांकि सार्वजनिक मंचों पर यह दावा कर रहे हैं कि विवाद सुलझ गया है, लेकिन हकीकत में दोनों नेताओं की ईगो की लड़ाई ने पार्टी को अधर में लटका दिया है। अब पंजीयन की प्रक्रिया तीन दिनों के अवकाश के बाद मंगलवार को होने की उम्मीद है।
66 सदस्यीय चंद्रपुर महानगरपालिका में जादुई आंकड़ा (बहुमत) 34 सीटों का है। वर्तमान में कांग्रेस और उसकी सहयोगी जनविकास सेना के पास कुल 30 सीटें हैं, जो बहुमत से 4 कदम दूर हैं। वहीं, भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन 24 सीटों के साथ मौके की तलाश में है। इधर, शिवसेना (ठाकरे गुट) और वंचित बहुजन आघाड़ी ने मिलकर 8 पार्षदों का एक स्वतंत्र ब्लॉक बनाया है, जो ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकता है। यदि कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी कलह जारी रहती है और 27 पार्षदों (13+14) का यह विभाजन खत्म नहीं होता, तो भाजपा को खेल पलटने का सुनहरा अवसर मिल सकता है।
विवादों के बीच विजय वडेट्टीवार ने मीडिया से बातचीत में नरमी दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि पार्टी का अहित न हो। वडेट्टीवार ने भरोसा जताया कि एक-दो दिनों के भीतर गटनेता का चयन सर्वसम्मति से कर लिया जाएगा और समर्थक दलों के साथ मिलकर सत्ता स्थापना का दावा पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महापौर पद के प्रत्याशी और अन्य सांगठनिक फैसलों पर प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का निर्णय अंतिम होगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर वडेट्टीवार और धानोरकर समर्थकों के बीच की खाई को भरना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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