Chandrapur Tiger Attack
Chandrapur Tiger Attack : महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. जिले के सिंदेवाही तहसील के अंतर्गत आने वाले गुंजेवाही गांव के पास के जंगलों में शुक्रवार की सुबह बाघ ने घात लगाकर हमला कर दिया, जिसमें चार ग्रामीण महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई. यह खौफनाक हादसा सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच का बताया जा रहा है. मृतक महिलाएं अपने दैनिक भरण-पोषण के लिए गांव से सटे जंगल में तेंदूपत्ता इकट्ठा करने गई थीं. इस वीभत्स घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत और सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गुंजेवाही गांव की सात महिलाओं का एक समूह हर रोज की तरह शुक्रवार को भी तड़के तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल के भीतर गया था. काम करने के दौरान ही अचानक जंगल में बाघ की भीषण दहाड़ गूंज उठी. अचानक आए इस खतरे को भांपते हुए तीन महिलाएं सूझबूझ दिखाते हुए तेजी से दौड़कर किसी तरह जंगल की सीमा से बाहर निकलने में कामयाब रहीं. परंतु, बाकी बची चार महिलाओं को संभलने का मौका नहीं मिला और वे बाघ का क्रूर शिकार बन गईं. गौरतलब है कि चंद्रपुर जिला लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष का केंद्र रहा है. अकेले पिछले वर्ष यहां बाघों के हमलों में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि चालू वर्ष 2026 में अब तक 19 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
जंगल में हुए इस भीषण हमले के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने शवों को बरामद कर उनकी पहचान कर ली है. मृतकों की शिनाख्त कवड़ाबाई दादाजी मोहुर्ले (उम्र 45 वर्ष), अनीताबाई दादाजी मोहुर्ले (उम्र 40 वर्ष), सुनीता कौशिक मोहुर्ले (उम्र 38 वर्ष) और संगीता संतोष चौधरी (उम्र 50 वर्ष) के रूप में की गई है. ये सभी मृतक महिलाएं ब्रह्मपुरी डिवीजन के अंतर्गत आने वाले सिंदेवाही रेंज के गुंजेवाही गांव की रहने वाली थीं. पुलिस ने पंचनामा करने के बाद सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है.
इस हृदयविदारक हादसे ने गुंजेवाही गांव के कई अत्यंत गरीब परिवारों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. मृतका सुनीता मोहुर्ले के पति की दो साल पहले ही मृत्यु हो चुकी थी. वह अकेले ही मजदूरी करके अपनी दो मासूम बेटियों (एक 10 वर्ष और दूसरी 7 वर्ष) का पेट पाल रही थीं, जिनकी देखभाल करने वाला अब कोई नहीं बचा है. वहीं, मृतक कवड़ाबाई और अनीताबाई आपस में सगी बहनें थीं और अपने घर की मुख्य आधार थीं. उनका भाई पूरी तरह से विकलांग है और वृद्ध मां गंभीर रूप से बीमार रहती हैं. चौथी मृतक महिला संगीता चौधरी के पति भी अपाहिज हैं, जिससे अब इस परिवार के सामने भी भूखे मरने की नौबत आ गई है.
इस गंभीर घटना के बाद सिंदेवाही की रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) अंजली सायंकार ने बताया कि वन विभाग लगातार ग्रामीणों को जंगलों में न जाने के लिए जागरूक कर रहा है और इन महिलाओं को भी पहले चेतावनी दी गई थी. विभाग द्वारा ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए सीटी और सिर के पीछे पहनने वाले विशेष मुखौटे (मास्क) भी दिए गए हैं. फिलहाल, हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए घटनास्थल के आसपास 10 अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 4 लाइव ट्रैकिंग कैमरे शामिल हैं. इसके साथ ही इलाके में चार बड़े पिंजरे लगाए गए हैं और वन विभाग की तीन विशेष टीमें लगातार गश्त कर रही हैं ताकि हिंसक बाघ को जल्द से जल्द काबू किया जा सके.
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