Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर घमासान मच गया है। पार्टी के अंदर असंतोष और खींचतान अब सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ रही है। रायपुर जिले से दावेदार रहे श्रीकुमार मेनन की नाराजगी भरी पोस्ट ने कांग्रेस संगठन के भीतर मचे तूफान को उजागर कर दिया है।
श्रीकुमार मेनन ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा कि “धोखा, गद्दार और पीठ में छुरा” जैसे शब्द अब उनके अनुभव का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि संगठन सृजन अभियान में कई दावेदार अपने चयन न होने या नजरअंदाज किए जाने से नाराज हैं।
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के भीतर इस तरह की नाराजगी सोशल मीडिया पर दिखी हो। इससे पहले भी नेता शिव सिंह ठाकुर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि उन्हें अब शायद अपने इंजीनियरिंग प्रोफेशन में लौटना पड़े। हालांकि बाद में उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी थी। ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की लहर गहराती जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 41 जिलों के लिए नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। प्रत्येक जिले से छह-छह नामों का पैनल बनाकर पर्यवेक्षक उसे AICC (ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी) को भेजेंगे। अंतिम फैसला अब कांग्रेस हाईकमान के हाथों में है।पार्टी सूत्रों के अनुसार, रायपुर, दुर्ग, बस्तर और बिलासपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा दावेदारी और विवाद हैं। नेताओं की पोस्ट और बयानबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि हर जिले में नियुक्तियों को लेकर गुटबाजी बढ़ती जा रही है।
इस मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरने में देर नहीं की। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय श्रीवास्तव ने बयान दिया कि, “कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान महज दिखावा है। असली फैसले दिल्ली में होते हैं, राज्य के नेताओं की राय सिर्फ औपचारिकता है।”
कांग्रेस ने इस आरोप पर कड़ा पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि, “किसी की व्यक्तिगत नाराजगी को संगठन की सामूहिक प्रक्रिया से जोड़ना भाजपा नेताओं के मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है जहां हर कार्यकर्ता को अपनी बात रखने की आजादी है।”
कांग्रेस के अंदर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद संगठन को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। संगठन सृजन अभियान के जरिए कांग्रेस पर नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है। लेकिन जिस तरह से स्थानीय नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है, उससे यह प्रयास मुश्किलों में घिरता दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया पर जारी नाराजगी और आरोप-प्रत्यारोप ने कांग्रेस के अंदर के असंतोष को उजागर कर दिया है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर हैं, जो जल्द ही नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर सकता है। सवाल यह है कि क्या यह सूची संगठन में स्थिरता लाएगी या असंतोष की आग को और भड़काएगी — इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
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