Charlie Chaplin
Charlie Chaplin Death: चार्ली चैपलिन का जन्म 16 अप्रैल 1889 को लंदन की तंग गलियों और भीषण गरीबी के बीच हुआ था। उनका बचपन अभावों और संघर्षों की एक ऐसी दास्तान था, जिसने उनके भीतर मानवीय संवेदनाओं को कूट-कूट कर भर दिया। इसी संघर्ष की उपज था उनका अमर किरदार ‘द ट्रैम्प’। छोटी टोपी, हाथ में छड़ी, ढीली पैंट और जरूरत से बड़े जूते पहनकर जब वे पर्दे पर आए, तो उन्होंने कॉमेडी की परिभाषा बदल दी। ‘सिटी लाइट्स’, ‘मॉडर्न टाइम्स’ और ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि पूंजीवाद और तानाशाही पर भी कड़ा प्रहार किया।
अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में चैपलिन स्विट्जरलैंड के शांत वातावरण में बस गए थे। 25 दिसंबर 1977 को, जब पूरी दुनिया क्रिसमस की खुशियां मना रही थी, तब 88 वर्ष की आयु में इस महान कलाकार ने नींद में ही अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से वैश्विक सिनेमा में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया जिसे आज तक भरा नहीं जा सका है। उन्हें स्विट्जरलैंड के ‘कौसियर-सुर-वेवे’ कब्रिस्तान में पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया। लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि शांति की तलाश में रहने वाले इस कलाकार की कब्र को कोई अपवित्र कर सकता है।
चार्ली चैपलिन के दफन होने के करीब तीन महीने बाद, मार्च 1978 में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। उनकी कब्र को खोदकर उनकी लाश चोरी कर ली गई थी। अगली सुबह जब लोगों ने खाली कब्र देखी, तो यह खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैल गई। किसी महान हस्ती के अवशेषों की चोरी उस समय की सबसे बड़ी आपराधिक घटनाओं में से एक मानी गई। पुलिस ने तुरंत बड़े पैमाने पर जांच शुरू की, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें कोई सुराग नहीं मिला।
जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठा कि यह चोरी किसी धार्मिक या राजनीतिक पागलपन का परिणाम नहीं, बल्कि पैसे ऐंठने की एक घिनौनी साजिश थी। दो शरणार्थियों (एक पोलिश और एक बुल्गारियाई नागरिक) ने चैपलिन की विधवा ऊना चैपलिन को फोन कर लाश के बदले भारी-भरकम फिरौती मांगी। हालांकि, ऊना ने अटूट साहस का परिचय देते हुए फिरौती देने से इनकार कर दिया और पुलिस का साथ दिया। पुलिस ने लगभग 600 फोन बूथों की निगरानी की और अंततः दोनों अपराधियों को दबोच लिया। चैपलिन का ताबूत पास के ही एक मक्के के खेत में दबा हुआ मिला।
मई 1978 में चार्ली चैपलिन के अवशेषों को दोबारा उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस बार परिवार और प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया। उनकी नई कब्र को कंक्रीट की एक मोटी और भारी परत से सील कर दिया गया, ताकि भविष्य में कोई फिर से ऐसी हिमाकत न कर सके। चार्ली चैपलिन का जीवन जितना नाटकीय और उतार-चढ़ाव भरा था, उनकी मौत के बाद की यह घटना उससे भी कहीं अधिक विचित्र रही। आज भी वे अपनी फिल्मों के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित हैं और हमें सिखाते हैं कि हंसी ही जीवन की सबसे बड़ी दवा है।
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