धर्म

Chhath Puja 2025: सूर्य और छठी मैया की एक साथ पूजा क्यों होती है? जानें शास्त्रीय कारण

Chhath Puja 2025: छठ पूजा लोक आस्था का एक महापर्व है, जो सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का अनूठा पर्व माना जाता है। यह पर्व न केवल सूर्य देव की उपासना का प्रतीक है, बल्कि छठी मैया की भक्ति और परिवार की मंगलकामना का भी प्रतीक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस महापर्व में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा एक साथ क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे के शास्त्रीय और पौराणिक कारण।

सूर्य देव की बहन हैं छठी मैया

मान्यता के अनुसार, छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया का भाई-बहन संबंध माना जाता है। पुराणों और लोक कथाओं के अनुसार, छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना गया है। इस पवित्र रिश्ते के कारण, व्रती (व्रत करने वाले) सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी बहन छठी मैया को प्रसन्न करते हैं।‘छठ’ शब्द संस्कृत के षष्ठी से लिया गया है, जिसका अर्थ है छठा दिन। छठ पर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, और इस दिन छठी मैया की पूजा का विशेष महत्व है। छठी मैया को बच्चों की रक्षा, उनकी लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए पूजा जाता है। इसलिए महिलाएं यह व्रत संतान सुख और परिवार की मंगलकामना के लिए रखती हैं।

सूर्य और शक्ति का संयुक्त पूजन

ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, किसी भी देवता की पूजा से पहले उनकी शक्ति की आराधना करना अनिवार्य माना जाता है। छठी मैया को सूर्य देव की शक्ति स्वरूपा भी माना जाता है। इसलिए, छठ पर्व पर पहले उनकी पूजा होती है और फिर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।

डूबते और उगते सूर्य का महत्व

छठ पूजा में व्रती सूर्य को डूबते (सायंकालीन अर्घ्य) और उगते (प्रातःकालीन अर्घ्य) अर्घ्य देते हैं। डूबते सूर्य की अंतिम किरण को ‘प्रत्यूषा’ और उगते सूर्य की पहली किरण को ‘ऊषा’ कहा जाता है। शास्त्रों में छठी मैया को सूर्य की किरण की देवी या ऊर्जा का रूप माना गया है। इस प्रकार सूर्य और उनकी शक्ति का एक साथ पूजन होता है।

पूजन का अर्थ

छठ पूजा में सूर्य देव की आराधना से शारीरिक स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं, छठी मैया की पूजा से संतान की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की प्रार्थना होती है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सम्मान देने का प्रतीक भी है।

इस प्रकार, छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की संयुक्त उपासना का पर्व है। यह न केवल धार्मिक आस्था का महापर्व है, बल्कि प्रकृति, ऊर्जा और परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है। छठ पूजा 2025 में भी व्रती अपने समर्पण और भक्ति के माध्यम से स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करेंगे।

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