Naxal Surrender
Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम की है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जारी फरवरी 2026 की ‘स्टेट-वाइज राष्ट्रीय रैंकिंग’ में छत्तीसगढ़ ने बड़े राज्यों की श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि छत्तीसगढ़ ने पिछले एक महीने के भीतर अपनी रैंकिंग में 6 स्थानों की जबरदस्त छलांग लगाकर देश के अन्य विकसित और बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। राज्य की इस सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के ‘महतारी न्याय’ मॉडल को एक नई पहचान दी है।
राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ के अव्वल आने के पीछे विभाग की कड़ी मेहनत और पारदर्शी प्रक्रिया का बड़ा हाथ है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने 93.37% नामांकन और 83.87% की स्वीकृति दर के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतों के त्वरित समाधान में राज्य ने 93.95% की दर हासिल की है, जो सरकारी सेवाओं के प्रति जनता के भरोसे को दर्शाता है। योजना के तहत 30 दिनों से अधिक लंबित प्रकरणों की दर मात्र 7.07% रही है, जो यह सिद्ध करती है कि राज्य का प्रशासनिक अमला पात्र महिलाओं तक लाभ पहुँचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समस्त मैदानी अमले को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना गर्भवती महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जो उन्हें गर्भावस्था के दौरान न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूक भी करती है। छत्तीसगढ़ का देश में पहले स्थान पर आना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ अंतिम छोर पर बैठी महिला तक पहुँच रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस सफलता को राज्य के लिए एक ‘स्वर्णिम क्षण’ बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन और विभागीय टीम के आपसी समन्वय के कारण ही यह इतिहास रचा जा सका है। मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे मैदानी अमले ने पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को समय पर पूरा किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ भविष्य में भी इस शीर्ष स्थान को बनाए रखेगा और प्रदेश की हर पात्र महिला को योजना का लाभ सुनिश्चित कराएगा।
योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्रदेश की 1,86,586 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए अब तक 72 करोड़ 24 लाख 89 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में जमा कर दी है। बिचौलियों की अनुपस्थिति और सीधे खातों में राशि पहुँचने से योजना की विश्वसनीयता बढ़ी है। छत्तीसगढ़ अब मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।
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