CG Ayushman Scam
CG Ayushman Scam: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के क्रियान्वयन को लेकर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। राज्य नोडल एजेंसी ने नियमों की अनदेखी करने वाले कुल 59 निजी और सरकारी अस्पतालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले इन अस्पतालों पर निलंबन और भुगतान रोकने जैसी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी रायपुर बना है, जहाँ दर्जनों अस्पतालों के संचालन और सरकारी भुगतान पर संकट खड़ा हो गया है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग और नोडल एजेंसी ने अस्पतालों की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पूरी कार्रवाई को तीन विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया है। मुख्य रूप से ‘HEM 2.0’ पोर्टल पर पंजीकरण और डेटा अपडेट न करने को आधार बनाया गया है। इसमें कुल 33 अस्पतालों को योजना से सीधे तौर पर निलंबित कर दिया गया है, जबकि शेष 26 अस्पतालों के भुगतान और प्री-ऑथराइजेशन की सुविधा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पहली श्रेणी में उन अस्पतालों को रखा गया है जिन्होंने नई व्यवस्था के तहत HEM 2.0 पोर्टल पर एक बार भी अपना आवेदन प्रस्तुत नहीं किया। इन अस्पतालों को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया गया है। इस सूची में रायपुर के 13 बड़े अस्पताल शामिल हैं, जिनमें जौहरी, महादेव, न्यू रायपुरा, और सिद्धि विनायक जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा दुर्ग के 5 अस्पतालों (जैसे एपी सर्जिकल, साईं कृपा) और महासमुंद, बेमेतरा व गरियाबंद के एक-एक अस्पताल पर भी गाज गिरी है। आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज करना इन संस्थानों के लिए भारी पड़ा है।
कार्रवाई की दूसरी श्रेणी उन 12 अस्पतालों की है, जिन्होंने पोर्टल पर आवेदन तो किया था, लेकिन मांगी गई आवश्यक जानकारी अपडेट नहीं की। साथ ही, विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियों (Queries) का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इन अस्पतालों को तब तक निलंबित रखा जाएगा जब तक वे पोर्टल की सभी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर लेते। इसमें रायपुर के 8 अस्पताल (जैसे श्री दानी केयर, कालदा नर्सिंग होम, प्रज्ञा हॉस्पिटल) और महासमुंद, जांजगीर-चांपा व कोंडागांव के चिकित्सा संस्थान शामिल हैं।
तीसरी श्रेणी में वे 26 अस्पताल शामिल हैं जिनके आवेदन तकनीकी रूप से अधूरे पाए गए थे। बार-बार चेतावनी के बावजूद इन अस्पतालों ने त्रुटियों को सुधारकर दोबारा आवेदन नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने इन अस्पतालों के बकाया भुगतान पर रोक लगा दी है और नए मरीजों के लिए ‘प्री-ऑथ’ (इलाज से पहले की अनुमति) की सुविधा बंद कर दी है। इसका सीधा असर इन अस्पतालों के आर्थिक परिचालन पर पड़ेगा, क्योंकि आयुष्मान योजना के तहत होने वाली कमाई अब रुक जाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी पंजीकृत अस्पतालों को HEM 2.0 पोर्टल पर दस्तावेजीकरण पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की अंतिम समय सीमा दी थी। इस दौरान विभाग द्वारा कई बार रिमाइंडर्स और नोटिस भेजे गए, लेकिन अस्पतालों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। राज्य नोडल एजेंसी ने अब स्पष्ट कर दिया है कि बिना उचित दस्तावेजों और पोर्टल अपडेट के किसी भी अस्पताल को योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। रायपुर में सबसे ज्यादा 44 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई यह दर्शाती है कि राजधानी के बड़े संस्थान भी नियमों के प्रति लापरवाह रहे हैं।
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