Opium Farming Case
Opium Farming Case : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में राजनीति और अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम, जिन्होंने कुछ समय पहले एक भाजपा नेता के खेत में अफीम की अवैध खेती का पर्दाफाश किया था, अब खुद अपने पद से हाथ धो बैठे हैं। एसडीएम कोर्ट ने उन्हें चुनावी हलफनामे में गंभीर आपराधिक जानकारी छिपाने का दोषी पाते हुए सरपंच पद से बर्खास्त कर दिया है। यह मामला आपसी रंजिश और कानूनी दांवपेच के बीच उलझता नजर आ रहा है।
दुर्ग जिले में अफीम की अवैध खेती का पहला बड़ा मामला तब प्रकाश में आया जब समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने इसकी शिकायत पुलिस से की। गौतम ने आरोप लगाया था कि बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार अपने खेत में चोरी-छिपे अफीम उगा रहे हैं। पुलिस ने छापेमारी के दौरान शिकायत को सही पाया और ताम्रकार को गिरफ्तार कर लिया। इस खुलासे के बाद जिले की राजनीति में हड़कंप मच गया था। हालांकि, इस कार्रवाई के पीछे लंबे समय से चली आ रही व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा था।
सरपंच अरुण गौतम की मुश्किलें तब बढ़ीं जब उनके खिलाफ एसडीएम (राजस्व) कोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने पाया कि साल 2025 के पंचायत चुनाव के दौरान अरुण गौतम ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी थी। गौतम के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, जिन्हें उन्होंने चुनाव आयोग से छिपाया था। नियमों के मुताबिक, किसी भी उम्मीदवार के लिए अपने सभी आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी देना अनिवार्य होता है। इसी उल्लंघन के आधार पर कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया।
इस मामले की कानूनी लड़ाई काफी दिलचस्प रही। चुनाव में दूसरे स्थान पर रही प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने नामांकन के समय ही गौतम की उम्मीदवारी पर आपत्ति जताई थी। उस वक्त रिटर्निंग ऑफिसर ने उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद भुवनेश्वरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा एसडीएम कोर्ट पहुंचा, जहां गहन दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि दुर्ग कोर्ट में गौतम के खिलाफ मामला लंबित था। कोर्ट ने माना कि जानकारी छिपाना लोकतंत्र की पारदर्शिता के खिलाफ है।
भुवनेश्वरी देशमुख ने कोर्ट से मांग की थी कि अरुण गौतम की बर्खास्तगी के बाद उन्हें सरपंच घोषित किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट का तर्क था कि अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी को 741 वोट मिले। जीत का अंतर बड़ा होने के कारण सीधे दूसरे प्रत्याशी को विजेता बनाना उचित नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने समोदा गांव में सरपंच पद को रिक्त घोषित कर दिया है और दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है ताकि वहां जल्द उपचुनाव कराए जा सकें।
यह पूरा घटनाक्रम केवल कानूनी नहीं बल्कि आपसी रंजिश का परिणाम भी माना जा रहा है। एक तरफ जहां सरपंच ने बीजेपी नेता पर अफीम की खेती का आरोप लगाकर जेल भिजवाया, वहीं विनायक ताम्रकार ने भी सरपंच के आपराधिक अतीत को खंगालकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अफीम कांड के बाद से ही दोनों गुटों के बीच तनाव बना हुआ था। अब सरपंच की बर्खास्तगी के बाद गांव में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। ग्रामीण अब नए सिरे से होने वाले चुनाव और गांव की शांति व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
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