Chhattisgarh Crime
Chhattisgarh Crime: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। महज खेत से मटर तोड़कर खाने जैसी छोटी सी बात पर एक युवक ने अपना आपा खो दिया और दो मासूम बच्चों को वहशीपन का शिकार बनाया। आरोपी ने न केवल बच्चों को बंधक बनाया, बल्कि उनके साथ ऐसी अमानवीयता की जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
घटना राजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम लडुआ की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 जनवरी 2026 की दोपहर को 7 वर्षीय मासूम संस्कार टोप्पो और उसके चचेरे भाई ने खेलते-खेलते पड़ोस में स्थित कपिल उरांव के खेत से कुछ मटर तोड़कर खा लिए थे। बच्चों की यह मासूम सी हरकत आरोपी कपिल को इतनी नागवार गुजरी कि उसने कानून और इंसानियत दोनों को ताक पर रख दिया। बच्चों को सबक सिखाने के नाम पर उसने जो कृत्य किया, उसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।
आरोप है कि 26 वर्षीय आरोपी कपिल उरांव दोनों नाबालिग बच्चों को जबरन घसीटते हुए अपने घर ले गया। वहां उसने बच्चों के साथ गंदी-गंदी गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब आरोपी ने दोनों मासूमों के हाथ और पैर रस्सी से मजबूती से बांध दिए। बच्चों को इसी अवस्था में उसने अपने घर के आंगन में बंधक बनाकर रखा। मासूम बच्चे दर्द से कराहते रहे और रहम की भीख मांगते रहे, लेकिन आरोपी का दिल नहीं पसीजा। उसने हाथ-मुक्कों और लातों से उनकी बेरहमी से पिटाई की।
जब बच्चों के परिजनों को इस बर्बरता की जानकारी मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित पिता कृष्ण नाथ टोप्पो ने तुरंत राजपुर थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता और मासूमों के साथ हुई क्रूरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। राजपुर पुलिस ने बिना देरी किए आरोपी कपिल उरांव के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। प्रारंभ में धारा 137(2), 296, 351(2), 115(2), और 127(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में विवेचना के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें धारा 140(3) भी जोड़ी गई। पुलिस की कड़ाई से पूछताछ के दौरान आरोपी कपिल उरांव ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती हिंसा और मानसिक संवेदनहीनता का एक खतरनाक संकेत है। मटर के कुछ दानों के लिए सात-आठ साल के बच्चों को रस्सी से बांधकर पीटना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। हालांकि, राजपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि कानून मासूमों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल पीड़ित बच्चे सदमे में हैं और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है, जबकि आरोपी अब जेल की सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहा है।
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