Pollution Crackdown
Pollution Crackdown: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ‘छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल’ ने एक निर्णायक अभियान छेड़ दिया है। मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा औद्योगिक इकाइयों की सतत निगरानी और नियमित निरीक्षण के दौरान गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन पाए गए हैं। 27 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्य के औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के संतुलन को बनाए रखना है।
जनवरी 2026 से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 23 प्रमुख उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन इकाइयों में उरला और सिलतरा जैसे औद्योगिक हब के दिग्गज नाम शामिल हैं। विशेष रूप से वास्वानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, शिल्फी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड और एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड जैसे स्पंज आयरन उद्योगों में भारी प्रदूषण की स्थिति पाई गई है। इसके अतिरिक्त, सारडा एनर्जी मिनरल्स लिमिटेड के विरुद्ध बिना किसी पूर्व अनुमति के फ्लाई ऐश (राख) डंपिंग करने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसके लिए उन्हें सख्त नोटिस थमाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अब धरातल पर सुधार अनिवार्य है।
पर्यावरण मंडल ने उन उद्योगों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है जिन्होंने नोटिस के बावजूद अपनी कार्यप्रणाली में संतोषजनक सुधार नहीं किया। बार-बार मिल रही शिकायतों और मंडल की सम्मति (Consent) के बिना अवैध रूप से संचालन करने के कारण अब तक 30 औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध ‘क्लोजर ऑर्डर’ जारी कर दिया गया है। इन इकाइयों में न केवल उत्पादन बंद करा दिया गया है, बल्कि संबंधित बिजली विभाग के माध्यम से उनके विद्युत विच्छेदन (डिस्कनेक्शन) की कार्रवाई भी पूरी की जा चुकी है। मंडल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक ये उद्योग सभी वैधानिक शर्तों और पर्यावरणीय मानकों को पूर्णतः बहाल नहीं कर लेते, तब तक उन्हें पुनः संचालन की अनुमति किसी भी सूरत में नहीं दी जाएगी।
नियमों के उल्लंघन को केवल फैक्ट्रियां बंद करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि ‘प्रदूषक भुगतान करे’ (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत के तहत भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया है। पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले 13 विशिष्ट उद्योगों पर कुल 28 लाख 92 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) अधिरोपित की गई है। यह राशि उन उद्योगों से वसूली जाएगी जिन्होंने जल स्रोतों और वायुमंडल को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है। विभाग का मानना है कि इस तरह के कड़े आर्थिक दंड से अन्य उद्योगों को भी सख्त संदेश जाएगा कि पर्यावरण की कीमत पर मुनाफाखोरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इस कार्रवाई के माध्यम से सभी औद्योगिक संगठनों और संबंधित सरकारी विभागों से अपील की है कि वे प्रशासनिक निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में भी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में औचक निरीक्षण का दौर जारी रहेगा। यदि कोई भी इकाई नियमों के विरुद्ध जाकर संचालन करती पाई गई, तो उसके विरुद्ध भविष्य में और भी कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का यह कदम छत्तीसगढ़ को एक स्वच्छ और हरित औद्योगिक प्रदेश बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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