Chhattisgarh Prisoner Release
Chhattisgarh Prisoner Release: छत्तीसगढ़ सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण और सुधारात्मक न्याय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आजीवन कारावास की सजा काट रहे 10 बंदियों को बड़ी राहत दी है। राज्य दण्डादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिशों पर मुहर लगाते हुए शासन ने इन कैदियों की समय से पहले रिहाई को हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय उन कैदियों के लिए जीवन की नई शुरुआत जैसा है, जो लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे अपने किए का पश्चाताप कर रहे थे। सोमवार, 30 मार्च 2026 को इन सभी बंदियों को औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद जेल से मुक्त कर दिया जाएगा।
इस रिहाई की प्रक्रिया की शुरुआत जेल महानिदेशक और बोर्ड के सदस्य सचिव हिमांशु गुप्ता द्वारा भेजे गए प्रस्तावों से हुई। कुल 16 प्रकरणों को समीक्षा के लिए चुना गया था, जिस पर 12 फरवरी 2026 को बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। बोर्ड ने केवल उन्हीं मामलों पर विचार किया जहाँ कैदी 14 वर्ष से अधिक की सजा पूरी कर चुके थे। निर्णय लेने से पहले संबंधित न्यायालय, जेल अधीक्षक, चिकित्सा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट की गोपनीय रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रिहा होने वाले व्यक्ति समाज के लिए खतरा नहीं हैं।
बोर्ड ने कैदियों के जेल में बिताए गए समय, उनके आचरण, स्वास्थ्य और उम्र का आकलन करने के बाद 9 मामलों में ‘सशर्त रिहाई’ की सिफारिश की। इन कैदियों को आजाद होने के लिए कुछ सख्त कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। रिहाई की शर्तों के अनुसार, प्रत्येक बंदी को 50 हजार रुपये का निजी मुचलका जमा करना होगा। साथ ही, उन्हें एक शपथ पत्र देना होगा कि वे भविष्य में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं होंगे। यदि किसी भी स्तर पर इन शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उनकी रिहाई तत्काल निरस्त कर दी जाएगी और उन्हें शेष सजा काटने के लिए वापस जेल भेज दिया जाएगा।
सशर्त रिहाई पाने वाले इन 9 कैदियों में सबसे अधिक संख्या केंद्रीय जेल दुर्ग की है। दुर्ग जेल से रिहा होने वाले कैदियों में प्रेमलाल बंजारे, लोचन सतनामी, ओमप्रकाश, पुरानिक, दलित कुमार, दगन उर्फ रामकुमार, कचरूराम लोधी और पीलूराम शामिल हैं। इन आठ कैदियों के अलावा, एक अन्य बंदी गोपाल कंवर को केंद्रीय जेल अंबिकापुर से रिहा किया जाएगा। ये सभी कैदी हत्या (मर्डर) के मामलों में सजा काट रहे थे और जेल रिकॉर्ड के अनुसार इनका व्यवहार पिछले वर्षों में काफी सकारात्मक और सुधारात्मक रहा है।
इस पूरे प्रकरण में एक मामला विशेष सहानुभूति का रहा। केंद्रीय जेल रायपुर के बंदी भागीरथी उर्फ भागी को सरकार ने ‘निःशर्त रिहाई’ (Unconditional Release) देने का फैसला किया है। बोर्ड ने उनकी अत्यधिक उम्र और जेल में बिताए गए बहुत लंबे समय को देखते हुए बिना किसी शर्त के उन्हें मुक्त करने की सिफारिश की थी। सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए उनकी शेष सजा माफ कर दी है। यह निर्णय यह दर्शाता है कि कानून में दंड के साथ-साथ मानवीय करुणा और सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
रायपुर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने इस प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पूरी कार्यवाही ‘जेल नियम 358’ के प्रावधानों के तहत की जाती है। इस नियम के अनुसार, जो कैदी अपनी तय सजा का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लेते हैं और जिनका आचरण अनुकरणीय होता है, उनके मामलों को जिला प्रशासन और पुलिस की राय के साथ जेल मुख्यालय भेजा जाता है। अंततः पुनर्विलोकन बोर्ड की समीक्षा और शासन की मंजूरी के बाद ही उनकी सजा माफी की प्रक्रिया पूरी होती है। सोमवार को होने वाली यह रिहाई इसी पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है।
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