छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला, भूपेश बघेल के बेटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ED से मांगा जवाब

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ईडी (एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ईडी से दस दिन में जवाब मांगा है।चैतन्य बघेल के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को पूछताछ के लिए कोई समन नहीं दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि केवल यह आधार पर्याप्त नहीं है कि जांच में सहयोग नहीं किया गया, इसलिए गिरफ्तारी अवैध और अनुचित है।

ईडी की ओर से जवाब

ईडी की तरफ से ASG राजू ने कोर्ट में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन महीने में जांच पूरी करने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कर रही है और जल्द ही आवश्यक दस्तावेज और सबूत प्रस्तुत करेगी।

मामला 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा

यह मामला 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से भारी गड़बड़ी की गई। इस घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रही हैं।इस मामले में बताया गया है कि शराब लाइसेंस और संबंधित लेनदेन में गड़बड़ियां की गईं, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी इसी संदर्भ में हुई है।

राजनीतिक और कानूनी पहलू

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार से जुड़े होने के कारण यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। विपक्ष और मीडिया लगातार इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने इसे राजनीतिक निशाना बताया है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईडी को नोटिस जारी करना यह संकेत है कि गिरफ्तारी की वैधता और प्रक्रिया पर न्यायालय गहनता से विचार करेगा। यह मामला भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में अधिकारों और एजेंसी की जांच शक्तियों के बीच संतुलन का परीक्षण भी है।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तीन मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. गिरफ्तारी की वैधता – क्या समन न भेजकर गिरफ्तारी कानूनी है?

  2. ईडी की जांच प्रक्रिया – जांच पूरी करने में कितनी समयसीमा और प्रक्रिया का पालन हुआ।

  3. संबंधित सबूत – आरोप और सबूतों के बीच संतुलन।

इस मामले की अगली सुनवाई दस दिन के भीतर होने की संभावना है, जब ईडी अपनी प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। इस दौरान चैतन्य बघेल की सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा पर भी अदालत का ध्यान रहेगा।

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