Newborn Death MCB District : छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले से चिकित्सा लापरवाही का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक महिला ने स्वास्थ्य कर्मियों पर प्रसव के दौरान अमानवीय व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि स्टाफ नर्सों ने उसके पेट पर चढ़कर दबाव बनाया, जिसके कारण उसके नवजात शिशु की जान चली गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम गठित करने का निर्णय लिया है।

नॉर्मल डिलीवरी के नाम पर अमानवीयता का आरोप
पीड़िता नम्रता सिंह (35 वर्ष) के अनुसार, उन्हें 10 अप्रैल को प्रसव पीड़ा होने पर जनकपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नम्रता ने आरोप लगाया कि प्रसव कक्ष में मौजूद नर्सों ने सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) कराने के नाम पर उनके साथ अत्यंत क्रूर व्यवहार किया। पीड़िता का कहना है कि नर्सें उनके पेट पर चढ़ गईं और जोर-जोर से दबाव बनाने लगीं। जब उन्होंने दर्द के कारण विरोध किया, तो नर्सों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट की धमकी देकर उन्हें चुप करा दिया। इस प्रक्रिया के दौरान नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया, जिससे परिजनों का बुरा हाल है।
परिजनों का फूटा गुस्सा और मारपीट की धमकी
नवजात की मौत के बाद अस्पताल परिसर में तनाव व्याप्त हो गया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान न केवल चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई, बल्कि अस्पताल के स्टाफ ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर उनके साथ बदतमीजी की। महिला की हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल मध्य प्रदेश के शहडोल रेफर कर दिया गया। स्थानीय निवासियों और परिजनों ने अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
बीएमओ ने आरोपों को किया खारिज: बताया ‘निर्धारित प्रक्रिया’
इस संवेदनशील मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. रमन ने अस्पताल का बचाव किया है। उन्होंने ‘पेट पर चढ़ने’ के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया। बीएमओ के अनुसार, महिला की स्थिति पहले से ही नाजुक थी और वह अपनी संभावित डिलीवरी डेट से 10 दिन देरी से अस्पताल पहुंची थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब बच्चा जन्म के समय फंस जाता है, तो मां की जान बचाने के लिए पेट पर हल्का दबाव बनाना एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया है। डॉ. रमन का दावा है कि नर्सों ने केवल प्रोटोकॉल का पालन किया ताकि कम से कम मां की जान बचाई जा सके।
सोनोग्राफी रिपोर्ट और देरी से आने का तर्क
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सोनोग्राफी जांच के बाद परिजनों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि ऑपरेशन (सिजेरियन) की आवश्यकता पड़ सकती है। बीएमओ ने स्पष्ट किया कि प्रसव के बाद नवजात की धड़कन नहीं चल रही थी, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए शहडोल भेजा गया। प्रशासन का मानना है कि डिलीवरी की तारीख निकलने के बाद अस्पताल आने की वजह से जटिलताएं बढ़ी थीं, न कि स्टाफ की किसी जानबूझकर की गई गलती से।
सीएमएचओ ने दिए जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। डॉ. खरे ने घोषणा की है कि एक विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा जो अस्पताल के रिकॉर्ड और वहां मौजूद स्टाफ के बयानों की जांच करेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरा जिला स्वास्थ्य विभाग की इस जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
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