Chhattisgarh Paddy Scam : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी महाघोटाला, रिकॉर्ड से करोड़ों का धान गायब, मचा हड़कंप

Chhattisgarh Paddy Scam : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। दुर्ग जिले की 68 सहकारी समितियों में जब प्रशासनिक टीमों द्वारा धान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया गया, तो सरकारी रिकॉर्ड और गोदामों में असल में मौजूद धान की मात्रा में जमीन-आसमान का अंतर मिला। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, समितियों में कुल 27,900 क्विंटल धान कम पाया गया है। गायब हुए इस भारी-भरकम धान की अनुमानित सरकारी कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस खुलासे के बाद से ही सहकारी समितियों के प्रबंधकों और बिचौलियों के बीच हड़कंप का माहौल है।

ads

कलेक्टर अभिजीत सिंह का कड़ा रुख

मामले की भीषण गंभीरता को देखते हुए दुर्ग जिले के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बेहद कड़ा और दंडात्मक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने गड़बड़ी करने वाली सभी संबंधित समितियों के प्रभारियों और प्रबंधकों को अंतिम चेतावनी देते हुए केवल चार दिन का कड़ा अल्टीमेटम (समय सीमा) जारी किया है। जिला प्रशासन ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर गायब धान को वापस स्टॉक में नहीं लाया गया या फिर उसके बदले की पूरी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की गई, तो बिना किसी रियायत के दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

ads

डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर

जिले में धान खरीदी केंद्रों की शुचिता परखने के लिए चलाए गए इस विशेष मिलान और सत्यापन अभियान ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह केवल बही-खाते या रिकॉर्ड को लिखने में हुई मानवीय त्रुटि का सामान्य मामला नहीं है। बल्कि यह धान के उठाव, मिलिंग और परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) की पूरी प्रक्रिया में जानबूझकर की गई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है। दुर्ग का यह धान घोटाला अब प्रशासन की प्राथमिक जांच के केंद्र में आ गया है, क्योंकि धान खरीदी सीधे तौर पर प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की आजीविका और उनके हक से जुड़ी हुई है।

धमधा और जामगांव आर समिति में सबसे बड़ी चोरी

सरकारी जांच के दौरान सबसे ज्यादा कालाबाज़ारी और गड़बड़ी धमधा सहकारी समिति में देखने को मिली है, जहां अकेले ही रिकॉर्ड से 4,646 क्विंटल धान गायब पाया गया। इसके अलावा जामगांव आर समिति में भी इसी तरह की गंभीर अनियमितताएं और भारी मात्रा में धान की शॉर्टेज मिली है। इन दोनों ही मामलों में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। दूसरी ओर, ननकट्टी समिति के प्रभारी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कम पाए गए धान की पूरी समतुल्य राशि प्रशासन के पास जमा करवा दी है, जिससे वहां की स्थिति अब साफ हो गई है।

बाकी समितियों की भी तय होगी जवाबदेही

जिला प्रशासन अब बची हुई अन्य सभी दागी समितियों और उनके अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की कवायद में जुट गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच के किसी भी स्तर पर यह साबित होता है कि सरकारी धान को जानबूझकर खुर्द-बुर्द किया गया है या वित्तीय धोखाधड़ी की गई है, तो संबंधित दोषियों पर रासुका या अन्य सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद से एहतियातन जिले की अन्य सभी सहकारी समितियों में भी पिछले सालों के रिकॉर्ड और वर्तमान धान स्टॉक की री-चेकिंग की रफ्तार दोगुनी कर दी गई है।

धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर संकट

छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य की पूरी अर्थव्यवस्था धान खरीदी और किसानों के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच ढाई करोड़ रुपये का यह बड़ा अंतर आना पूरी धान खरीदी प्रणाली और उसकी पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से व्यवस्था के प्रति किसानों का भरोसा डगमगा सकता है। भविष्य में ऐसी चोरियों को रोकने के लिए अब केवल कागजी दावों के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड ट्रैकिंग, सैटेलाइट मैपिंग, नियमित थर्ड-पार्टी ऑडिट और औचक भौतिक सत्यापन को अनिवार्य रूप से अधिक प्रभावी और कड़ा बनाना होगा।

कलेक्टर का कड़ा संदेश

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपने कड़े निर्देशों में दोहराया है कि सार्वजनिक संसाधनों और गरीब किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। निर्धारित चार दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद किसी भी दोषी को कोई अतिरिक्त मोहलत या कानूनी राहत नहीं दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि तंत्र में पारदर्शिता बहाल करने के लिए ऐसी सख्त और दंडात्मक कार्रवाई बेहद जरूरी है। फिलहाल, पूरे प्रदेश और दुर्ग जिले की जनता की नजरें प्रशासन की इस समय सीमा पर टिकी हैं कि चार दिन बाद कितने भ्रष्टाचारी पैसे जमा करते हैं और कितने सलाखों के पीछे जाते हैं।

Read More  :  Chhattisgarh IAS News : छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक बदलाव! IAS रमेश कुमार शर्मा बने सहकारिता आयुक्त

Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.