छत्तीसगढ़

Police Promotion Controversy: छत्तीसगढ़ पुलिस में प्रमोशन पर विवाद, कवर्धा एसपी ने लगाया भेदभाव का गंभीर आरोप

 Police Promotion Controversy:  छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में हाल ही में हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के पदोन्नति आदेशों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। कवर्धा के पुलिस अधीक्षक (SP) धर्मेंद्र सिंह ने अपनी ही सरकार और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रमोशन प्रक्रिया में पक्षपात और अन्याय का आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक विस्तृत पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका दावा है कि योग्यता और वरिष्ठता के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया है।

पदोन्नति की निष्पक्ष जांच की मांग

एसपी धर्मेंद्र सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उनके सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता के आधार पर वे पदोन्नति के पूर्ण हकदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ही बैच (2012) के कई अन्य अधिकारियों को उप-पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर प्रमोट कर दिया गया, लेकिन उनकी फाइल को रोक दिया गया। उन्होंने शासन से मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की एक निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनके मामले पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि विभाग में पारदर्शिता बनी रहे।

16 आईपीएस अफसरों का हुआ था प्रमोशन

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने 23 जनवरी 2026 को 16 आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति की सूची जारी की थी। इसमें 2001 बैच के आनंद छाबड़ा को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) बनाया गया। वहीं, 2008 बैच के प्रशांत अग्रवाल, मिलन कुर्रे, नीतू कमल और डी श्रवण को पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर पदोन्नत किया गया। इसी सूची में 2012 बैच के 8 अधिकारियों को डीआईजी बनाया गया, जिनमें डॉ. अभिषेक पल्लव और मोहित गर्ग जैसे नाम शामिल हैं। धर्मेंद्र सिंह इसी बैच के अधिकारी हैं, जिन्हें प्रमोशन नहीं मिला।

भेदभाव का आधार: पुराने मामले की दलील

धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि उनके प्रमोशन को रोकने के पीछे मध्य प्रदेश के एक पुराने मामले का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि उस मामले में पुलिस पहले ही ‘खात्मा’ रिपोर्ट पेश कर चुकी थी, हालांकि तकनीकी कारणों से उसे कोर्ट की मंजूरी नहीं मिली और जांच जारी बताई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बैच के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी इसी तरह के मामले लंबित थे, लेकिन उन्हें पदोन्नति दे दी गई, जबकि उनके साथ अलग मापदंड अपनाया गया।

नियमों का हवाला: “मैं किसी भी उल्लंघन की श्रेणी में नहीं”

भारत सरकार के प्रमोशन नियमों (DOPT Guidelines) का जिक्र करते हुए एसपी सिंह ने कहा कि पदोन्नति केवल तीन स्थितियों में रोकी जा सकती है:

  1. जब अधिकारी निलंबित (Suspend) हो।

  2. जब उसके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) चल रही हो।

  3. जब कोर्ट में किसी मामले का आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल हो चुका हो। धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि वे इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आते हैं, फिर भी उनके तीन प्रमोशन (जूनियर, सीनियर और डीआईजी स्केल) रोक दिए गए हैं।

प्रशासनिक छवि और सराहनीय कार्य

आईपीएस धर्मेंद्र सिंह छत्तीसगढ़ कैडर के 2012 बैच के अधिकारी हैं। वर्तमान में कवर्धा एसपी के रूप में वे अपनी कार्यशैली को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा के लिए चलाई गई उनकी पहलों और पुलिस-जनता के बीच समन्वय स्थापित करने के उनके प्रयासों की राज्य स्तर पर सराहना की गई है। ऐसे में एक कर्मठ अधिकारी द्वारा पदोन्नति में भेदभाव का आरोप लगाना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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